बरेली। फ्लैट दिलाने का सपना दिखाकर एडवांस राशि लेने और वर्षों तक निर्माण कार्य शुरू नहीं करने वाले बिल्डर के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय ने कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने हिमालयन हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके पार्टनर शलभ पाठक उर्फ शलभ शर्मा को सेवा में गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी मानते हुए खरीदार की जमा रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपये हर्जाना और 10 हजार रुपये वाद व्यय अदा करने के निर्देश दिए हैं।
फ्लैट बुक कराया, लेकिन सालों तक नहीं रखी गई एक भी ईंट
शास्त्री नगर निवासी 62 वर्षीय सुनील कुमार सहगल ने जनवरी 2018 में रामपुर-नैनीताल रोड स्थित परियोजना में करीब 32 लाख रुपये कीमत का 1550 वर्गफीट का फ्लैट बुक कराया था। बुकिंग के समय उन्होंने आरटीजीएस के माध्यम से 3.75 लाख रुपये अग्रिम राशि जमा की थी। समझौते के अनुसार बिल्डर को तीन वर्ष के भीतर निर्माण पूरा कर फ्लैट का कब्जा देना था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
कानूनी नोटिस का भी नहीं दिया जवाब
पीड़ित का आरोप था कि बिल्डर लगातार आश्वासन देकर समय टालता रहा। अक्टूबर 2023 में भेजे गए कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
45 दिन में रकम लौटाने का आदेश
आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार त्रिपाठी और सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता की पीठ ने बिल्डर को आदेश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर 3.75 लाख रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये भी पीड़ित को अदा किए जाएं।
उपभोक्ताओं के अधिकारों पर आयोग का सख्त संदेश
आयोग के इस फैसले को उन खरीदारों के लिए राहत माना जा रहा है, जो बिल्डरों की लापरवाही और अधूरी परियोजनाओं के कारण वर्षों से परेशान हैं। निर्णय से स्पष्ट संदेश गया है कि ग्राहकों से धन लेकर समय पर वादा पूरा न करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और आर्थिक दंड दोनों तय हैं।













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