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महोबा। बुंदेलखंड के महोबा जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक पिता की हत्या किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उसके अपने ही परिवार ने मिलकर कर दी। तीन बेटियां, पत्नी और नाबालिग बेटा—जिन पर जिंदगी भर भरोसा था, वही उसके कातिल बन बैठे। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस वारदात ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है और लोगों के बीच रिश्तों की गिरती संवेदनशीलता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

नाले में मिला शव, जांच में खुली साजिश की परतें

मामला पनवाड़ी थाना क्षेत्र के हैवतपुरा गांव का है। 14 अप्रैल को गांव के पास एक नाले में हरनारायण प्रजापति का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती तौर पर मामला संदिग्ध मौत का लग रहा था, लेकिन परिजनों की ओर से दी गई तहरीर और बयानबाजी में लगातार विरोधाभास मिलने के बाद पुलिस को शक गहरा गया। पुलिस ने जब मामले की गंभीरता से जांच शुरू की तो परत दर परत चौंकाने वाले खुलासे सामने आने लगे। मृतक के परिवार के ही सदस्यों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे थे। कभी घटना का समय बदलता, तो कभी घटनास्थल को लेकर अलग-अलग कहानी सामने आती। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला साधारण नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है। जब सख्ती से पूछताछ की गई तो पूरा परिवार ही टूट गया और हत्या की खौफनाक कहानी सामने आ गई। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव को नाले में फेंककर इसे हादसा या आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी।

82,500 रुपये के लिए रची गई खौफनाक साजिश

पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह के मुताबिक, हत्या के पीछे पैसों का विवाद मुख्य वजह बना। मृतक हरनारायण शराब पीने का आदी था और घर में अक्सर झगड़ा करता था। इसी बीच उसने अपनी बेटी सोनाली की शादी के लिए भैंस और बकरी बेचकर 82,500 रुपये जुटाए थे। यही रकम परिवार के बीच विवाद की जड़ बन गई। आरोप है कि पत्नी रामप्यारी, बेटियां ज्योति, सोनाली, पूजा और नाबालिग बेटे के साथ मिलकर एक साथी जयराम कुशवाहा ने हत्या की योजना बनाई। घटना की रात जब हरनारायण सो रहा था, तब सभी ने मिलकर रस्सी से उसका गला कस दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को घर के पीछे नाले में फेंक दिया गया और मोबाइल फोन भी तोड़कर फेंक दिया गया, ताकि पुलिस तक कोई सुराग न पहुंच सके।

पुलिस को गुमराह करते रहे, लेकिन सच से नहीं बच पाए

हत्या के बाद परिवार के सभी सदस्य लगातार पुलिस को गुमराह करते रहे। वे कभी घटना को दुर्घटना बताते, तो कभी किसी अज्ञात व्यक्ति पर शक जताते रहे। लेकिन पुलिस की सख्ती और लगातार बदलते बयानों ने सच्चाई को उजागर कर दिया। आखिरकार पुलिस ने पत्नी, तीनों बेटियों और उनके साथी को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग बेटे को भी विधिक प्रक्रिया के तहत किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया है। इस खुलासे के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग हैरान हैं कि जिन रिश्तों में ममता और अपनापन होना चाहिए था, वहीं इतनी निर्ममता कैसे आ गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल हत्या का नहीं, बल्कि सामाजिक गिरावट और पारिवारिक मूल्यों के टूटने का भी संकेत देता है।

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