नई दिल्ली। देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के इस फैसले के बाद डीए 58% से बढ़कर 60% हो गया है। इस फैसले से करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही जनवरी से एरियर मिलने के कारण कर्मचारियों की जेब में अतिरिक्त पैसा आएगा।
कैबिनेट की मुहर के साथ लागू हुआ फैसला
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में डीए बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि इस फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 6,791 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी से प्रभावी मानी जाएगी, यानी कर्मचारियों और पेंशनर्स को पिछले महीनों का एरियर भी मिलेगा। महंगाई भत्ता सीधे बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में दिया जाता है, इसलिए बढ़ोतरी का असर हर कर्मचारी की आय पर अलग-अलग पड़ेगा।
1 करोड़ से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस फैसले से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65-68 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। पेंशनर्स को डीए की जगह डीआर (Dearness Relief) मिलता है, जो अब 60% के स्तर पर पहुंच गया है। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच यह फैसला कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है। खासतौर पर मध्यम और निम्न वेतन वर्ग के कर्मचारियों को इसका अधिक लाभ मिलेगा।
कितनी बढ़ेगी सैलरी? ऐसे समझें पूरा गणित
डीए बढ़ने का सीधा असर कर्मचारियों की मासिक आय पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर: अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 36,500 रुपये है, तो पहले उसे 58% डीए के हिसाब से 21,170 रुपये मिलते थे अब 60% डीए के हिसाब से यह बढ़कर 21,900 रुपये हो जाएगा यानि हर महीने करीब 730 रुपये की बढ़ोतरी होगी। इसी तरह, अगर किसी पेंशनर की बेसिक पेंशन 9,000 रुपये है: पहले 58% के हिसाब से 5,220 रुपये डीआर मिल रहा था अब यह बढ़कर 5,400 रुपये हो जाएगा यानि पेंशन में हर महीने 180 रुपये का इजाफा होगा।
जनवरी से मिलेगा एरियर, बढ़ेगी इनकम
इस बार डीए बढ़ोतरी में देरी होने के कारण कर्मचारियों को जनवरी से एरियर भी मिलेगा। इसका मतलब है कि अप्रैल या मई की सैलरी के साथ कई महीनों का बकाया एक साथ मिलेगा, जिससे कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक राहत मिलेगी। एरियर की राशि कर्मचारी की बेसिक सैलरी और ग्रेड के अनुसार अलग-अलग होगी।
देरी पर उठे सवाल, क्या है वजह?
आमतौर पर केंद्र सरकार हर साल जनवरी और जुलाई में डीए संशोधन करती है। लेकिन इस बार जनवरी की बढ़ोतरी में देरी होने से कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस देरी के पीछे संभावित कारण 8वें वेतन आयोग की तैयारी हो सकती है। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक दबाव और बजट संतुलन भी एक वजह माने जा रहे हैं। हालांकि अब सरकार ने इस बढ़ोतरी पर मुहर लगाकर कर्मचारियों की चिंताओं को खत्म कर दिया है।
AICPI-IW के आंकड़ों पर आधारित है फैसला
डीए की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर की जाती है। पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर में उतार-चढ़ाव के बावजूद औसत स्तर इतना रहा कि 2% बढ़ोतरी तय मानी जा रही थी। सरकार ने इसी फॉर्मूले के आधार पर डीए में बढ़ोतरी का निर्णय लिया है।
दिवाली से पहले कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफा
इस फैसले को कर्मचारियों के लिए दिवाली से पहले बड़ा आर्थिक तोहफा माना जा रहा है। बढ़ी हुई सैलरी और एरियर के साथ कर्मचारियों की खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी, जिससे बाजार में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
साथ में अन्य बड़े फैसले भी
कैबिनेट ने डीए बढ़ोतरी के साथ-साथ कई अहम फैसले भी लिए हैं:
- सॉवरेन मेरिटाइम फंड को मंजूरी, 13,000 करोड़ रुपये का कॉर्पस
- भारतीय जहाजों के लिए सस्ता और स्थायी बीमा कवर
- विदेशी बीमा कंपनियों पर निर्भरता कम होगी
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी
इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 2028 तक बढ़ाने का फैसला भी लिया गया है, जिसके लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है।
आर्थिक प्रभाव और आगे की राह
डीए बढ़ोतरी से जहां कर्मचारियों को राहत मिलेगी, वहीं सरकार पर वित्तीय भार भी बढ़ेगा। हालांकि यह कदम महंगाई के प्रभाव को संतुलित करने और कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है। आने वाले समय में 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं, जिससे कर्मचारियों को और बड़े बदलाव की उम्मीद है।