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फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक मामूली चाय की दुकान से शुरू हुई कहानी अब बड़ा विवाद बन गई है। दो महीने पहले सपा प्रमुख Akhilesh Yadav के एक कप चाय पीने से चर्चाओं में आई ‘फेमस चाय’ की दुकान अब बंद हो चुकी है। दुकान संचालक आर्यन यादव ने आरोप लगाया है कि इस मुलाकात के बाद से ही वह लगातार दबाव, मारपीट और सरकारी जांचों के नाम पर परेशान किया जा रहा है।

दो महीने पहले की मुलाकात, अब बना विवाद का कारण

फतेहपुर के खागा तहसील क्षेत्र के चौकी चौराहा स्थित ‘शेषमन की फेमस चाय’ की दुकान उस वक्त सुर्खियों में आई थी, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव अचानक वहां पहुंचे थे। रास्ते में रुककर उन्होंने दुकान पर चाय पी और दुकान संचालक के बेटे आर्यन यादव से बातचीत भी की। इस दौरान ली गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। स्थानीय स्तर पर यह दुकान “फेमस” हो गई और आर्यन यादव को पहचान मिलने लगी। लेकिन यही पहचान अब उसके लिए परेशानी का कारण बन गई है।

आर्यन का आरोप: दबंगों और अफसरों ने किया जीना मुहाल

आर्यन यादव का कहना है कि जिस दिन से अखिलेश यादव उसकी दुकान पर आए, उसी दिन से उसकी मुश्किलें शुरू हो गईं। उसका आरोप है कि इलाके के कुछ दबंग आए दिन दुकान पर आकर गाली-गलौज और मारपीट करते हैं। इतना ही नहीं, उसने फूड एंड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आर्यन का कहना है कि सैंपल जांच के नाम पर अधिकारी बार-बार दुकान पर आकर उसे धमकाते हैं और मानसिक दबाव बनाते हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट में बयां किया दर्द

आर्यन यादव ने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया के जरिए भी सामने रखी। फेसबुक पर लिखे पोस्ट में उसने साफ कहा कि वह अब इस दबाव को सहन नहीं कर पा रहा है। उसने लिखा कि “जब से हमारी दुकान पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी चाय पीकर गए हैं, तब से हमें लगातार परेशान किया जा रहा है। दबंग मारपीट करते हैं, अधिकारी जांच के नाम पर धमकाते हैं। हम गरीब लोग हैं, लड़ाई नहीं कर सकते। इसलिए हम दुकान, गांव और घर छोड़कर जा रहे हैं।” यह पोस्ट सामने आने के बाद मामला और गरमा गया है।

मारपीट की घटना ने बढ़ाया विवाद

दरअसल, कुछ दिन पहले दुकान पर मारपीट की घटना भी हुई थी। आर्यन के पिता शेषमन यादव ने आरोप लगाया कि पैसे के लेनदेन को लेकर कुछ लोगों ने उनके बेटे पर हमला कर दिया। उनके मुताबिक, जरसीस अहमद, कयूम अहमद, यासीन अहमद समेत करीब 17 लोगों ने मिलकर आर्यन को पीटा। बीच-बचाव करने आए परिवार के अन्य सदस्यों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। लाठियों से हमला किया गया और गंभीर चोटें आईं। परिजनों का यह भी आरोप है कि हमलावरों ने इस दौरान अखिलेश यादव को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

पुलिस का पक्ष: लेनदेन विवाद में हुई मारपीट

इस पूरे मामले में पुलिस का रुख थोड़ा अलग है। प्रभारी निरीक्षक तेज बहादुर सिंह के अनुसार, यह मामला लेनदेन के विवाद से जुड़ा है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों में मारपीट हुई है और दोनों को चोटें आई हैं। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। फिलहाल पुलिस इसे राजनीतिक रंग देने से बच रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कह रही है।

दुकान बंद, गांव छोड़ने का ऐलान

लगातार हो रही घटनाओं और दबाव से परेशान होकर आर्यन यादव ने बड़ा कदम उठाया है। उसने अपनी चाय की दुकान बंद कर दी है और गांव छोड़ने का ऐलान किया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आर्यन का परिवार काफी समय से इसी दुकान के सहारे गुजर-बसर कर रहा था। दुकान बंद होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

राजनीतिक रंग लेने लगा मामला

घटना के सामने आने के बाद अब यह मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। जहां एक ओर सपा समर्थक इसे उत्पीड़न और राजनीतिक द्वेष से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर इसे सामान्य विवाद बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है। कई लोग आर्यन के समर्थन में सामने आए हैं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आर्यन के आरोप सही हैं, तो यह एक छोटे व्यापारी के उत्पीड़न का गंभीर मामला बन सकता है। वहीं अगर मामला सिर्फ लेनदेन विवाद का है, तो फिर इसे राजनीतिक रूप देने की कोशिशों की भी जांच जरूरी होगी।

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