परचम कुशाई से उर्स-ए-रजवी का आगाज, रिमझिम बारिश में सुब्हानी मियां ने अदा की रस्म, देश-विदेश से उमड़े जायरीन

उर्स-ए-रजवी

बरेली विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हज़रत में गुरुवार को 108वें उर्स-ए-रज़वी का शुभारंभ पारंपरिक परचमकुशाई की रस्म के साथ हुआ। रिमझिम बारिश के बीच दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) ने रात 9:20 बजे इस्लामिया मैदान स्थित रज़ा गेट पर रज़वी परचम फहराकर तीन दिवसीय उर्स का विधिवत आगाज़ किया। इस दौरान नारा-ए-तकबीर और मसलक-ए-आला हज़रत जिंदाबाद के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

उर्स की सभी रस्में दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा कादरी (अहसन मियां) की अध्यक्षता और सैय्यद आसिफ मियां की देखरेख में दरगाह परिसर एवं इस्लामिया मैदान में संपन्न हो रही हैं। देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह पहुंच रहे हैं।

उर्स-ए-रजवी
मुख्य परचमी जुलूस का जगह-जगह हुआ स्वागत

मुख्य परचमी जुलूस आजम नगर स्थित हाजी अल्लाह बख्श के आवास से सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की अगुवाई में निकला। जुलूस कुमार टाकीज, इंदिरा मार्केट और बिहारीपुर ढाल होते हुए दरगाह पहुंचा, जहां सलामी के बाद इस्लामिया मैदान तक गया। रास्ते भर विभिन्न स्थानों पर हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने फूल बरसाकर जुलूस और दरगाह प्रमुख का स्वागत किया। इसके अलावा ठिरिया निजावत खान और रहपुरा चौधरी से भी परचम और चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचे।

नातिया मुशायरा और कुल शरीफ की रस्म हुई अदा

परचमकुशाई के बाद आला हज़रत की लिखी नात और मनकबत से माहौल रूहानी हो उठा। शाम को महफिल-ए-मिलाद आयोजित हुई, जबकि देर रात नातिया मुशायरा चला। रात 10:35 बजे आला हज़रत के बड़े साहबजादे हुज्जातुल इस्लाम मुफ्ती हामिद रज़ा खान के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इस अवसर पर मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि हुज्जातुल इस्लाम ने शिक्षा और आर्थिक मजबूती पर विशेष जोर दिया तथा दुनिया भर में सुन्नियत की पहचान मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

आज होगी मजहब-ओ-जमालक कॉन्फ्रेंस

शुक्रवार को फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी होगी। सुबह 9:58 बजे रेहाने मिल्लत और 10:30 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद मजहब-ओ-जमालक कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें देशभर के उलेमा नामूस-ए-रिसालत, मिशन मसलक-ए-आला हज़रत, समाज सुधार, आपसी सौहार्द और सामाजिक बुराइयों के खात्मे जैसे विषयों पर विचार रखेंगे। रात में विश्वभर के प्रसिद्ध उलेमा की तकरीरें होंगी तथा देर रात मुफ्ती-ए-आज़म-ए-हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। उर्स के सफल संचालन के लिए दरगाह कमेटी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक दिन-रात व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।

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