इस्लामिया में सजा इल्म का बाजार : कंजुल ईमान, हदाइके बख्शिश के लिए लगी कतारें, फतावा-ए-रज़विया पर टूटी भीड़

बरेली 108वें उर्स-ए-रज़वी के साथ इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में इस्लामिक और उर्दू साहित्य का विशाल पुस्तक बाजार सज गया है। दरगाह आला हजरत पर हाजिरी देने के बाद बड़ी संख्या में जायरीन सीधे किताबों के स्टॉलों पर पहुंच रहे हैं। तीन दिवसीय उर्स के दौरान यह पुस्तक बाजार देश-विदेश से आए अकीदतमंदों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां एक ही स्थान पर हजारों धार्मिक और शोधपरक किताबें उपलब्ध हैं।

देश के बड़े प्रकाशकों ने लगाए स्टॉल

इस्लामिया मैदान में दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और बरेली समेत कई शहरों के प्रमुख इस्लामिक प्रकाशकों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। इस्लामी तालीम, तफ्सीर, हदीस, फिक्ह, सीरत, उर्दू अदब और आला हजरत की तस्नीफात से जुड़ी हजारों किताबें यहां उपलब्ध हैं। प्रकाशकों का कहना है कि उर्स के दौरान सबसे ज्यादा मांग उन्हीं किताबों की रहती है, जिन्हें लोग पूरे साल तलाशते हैं।

‘कंजुल ईमान’ और ‘फतावा-ए-रज़विया’ की सबसे ज्यादा मांग

पुस्तक बाजार में इस बार भी आला हजरत की लिखी और उनसे संबंधित किताबों की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है। कुरआन-ए-पाक के मशहूर उर्दू तर्जुमा ‘कंजुल ईमान’ को खरीदने के लिए लोगों की अच्छी-खासी भीड़ जुट रही है। इसके अलावा ‘फतावा-ए-रज़विया’, ‘हदाइके बख्शिश’, सीरत-ए-रसूल और दीनी मसाइल से जुड़ी किताबों की भी खूब खरीदारी हो रही है। मदरसों के छात्र, उलेमा और दूर-दराज से आए जायरीन इन पुस्तकों में विशेष रुचि दिखा रहे हैं।

नई पीढ़ी के लिए भी खास इंतजाम

बदलते दौर को देखते हुए कई प्रकाशकों ने युवाओं और बच्चों के लिए भी अलग सेक्शन तैयार किए हैं। क्यूआर कोड आधारित ऑडियो सामग्री, पॉकेट साइज दुआ और दुरूद की किताबें, उर्दू सीखने की शुरुआती पुस्तकें और बच्चों के लिए सचित्र दीनी किताबें भी स्टॉलों पर उपलब्ध हैं। इन पुस्तकों को खरीदने के लिए युवाओं और परिवारों की अच्छी भीड़ देखने को मिल रही है।

रियायती कीमतों पर मिल रही धार्मिक किताबें

उर्स के अवसर पर अधिकांश प्रकाशकों ने किताबों पर विशेष छूट भी दी है। कई स्टॉलों पर 20 से 40 प्रतिशत तक की रियायत मिलने से जायरीन अपनी पसंद की किताबें खरीद रहे हैं। बाहर से आए अकीदतमंदों का कहना है कि उर्स के दौरान एक ही स्थान पर प्रामाणिक इस्लामिक साहित्य आसानी से उपलब्ध हो जाता है, इसलिए वे अपने साथ-साथ परिवार और रिश्तेदारों के लिए भी किताबें खरीदकर ले जा रहे हैं।

इबादत के साथ इल्म से जुड़ने का भी मौका

उर्स-ए-रज़वी का यह पुस्तक बाजार केवल खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि इस्लामी इल्म, उर्दू अदब और आला हजरत की तालीमात से नई पीढ़ी को जोड़ने का भी बड़ा जरिया बन गया है। हर साल की तरह इस बार भी किताबों के स्टॉलों पर उमड़ रही भीड़ इस बात की गवाही दे रही है कि उर्स में इबादत के साथ इल्म हासिल करने की परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत है।

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