बरेली। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने गुरुवार को धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की मांग उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अविनाश सिंह को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि 5 जुलाई को लखनऊ में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान भगवान श्री हनुमान के स्वरूप में सजे व्यक्ति के हाथ में राजनीतिक दल का झंडा देकर प्रचार में शामिल किए जाने की घटना सामने आई। मोर्चा ने इसे करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए इस पर आपत्ति जताई। मीडिया से बातचीत में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिला अध्यक्ष आर्येंद्र मिश्रा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी स्वयं को सनातन धर्म की हितैषी बताती है, लेकिन उसके कुछ निर्णयों पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कारसेवकों पर गोली चलने की घटना से जुड़े लोगों को बाद में सम्मान और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों दी गईं।
इन फैसलों पर भी उठाए सवाल
आर्येंद्र मिश्रा ने मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण दिए जाने और नृपेंद्र मिश्र को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विषयों पर भी भाजपा को सनातन समाज के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि केवल सनातन धर्म ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के देवी-देवताओं, महापुरुषों और धार्मिक प्रतीकों का किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार या लाभ के लिए उपयोग प्रतिबंधित किया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार सख्त कानून बनाए, ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति धार्मिक आस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल न कर सके।
धर्म आस्था का विषय, राजनीति का नहीं
आर्येंद्र मिश्रा ने कहा कि धर्म आस्था और श्रद्धा का विषय है, इसे राजनीति का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। धार्मिक प्रतीकों की गरिमा और सम्मान बनाए रखना समाज और राजनीतिक दलों, दोनों की जिम्मेदारी है। ज्ञापन सौंपने के दौरान महानगर अध्यक्ष एकांश गुप्ता, जिला महासचिव शंभु पाठक, जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट प्रवेश त्रिवेदी, युवा महानगर अध्यक्ष देवांश शंखधार, महानगर मीडिया प्रभारी लक्ष्य अग्रवाल, संस्थापक सदस्य केशव शंखधार, रजत मिश्रा, विकास गुर्जर, हिमांशु शंखधार, विशाल शर्मा, अमित शर्मा, राहुल सोनकर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।