बरेली। टीईटी की अनिवार्यता से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को स्थायी रूप से मुक्त किए जाने की मांग को लेकर गुरुवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर जिले भर के शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में शिक्षक सेठ दामोदर दास स्वरूप पार्क में एकत्र हुए और बाद में नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे।
संगठन के कार्यकारी जिलाध्यक्ष एवं जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वर्ष 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किए जाने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 23 अगस्त 2010 को टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश में तत्कालीन नियमों एवं पात्रता मानकों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्तियां पूरी तरह वैध और विधिसम्मत तरीके से की गई थीं।
राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान का हवाला
महासंघ ने कहा कि इन शिक्षकों ने दशकों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, राष्ट्र निर्माण और विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे शिक्षकों को नई शर्तों के दायरे में लाना उनके साथ अन्याय होगा। जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि संगठन 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिकाओं पर आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करता है। इसके बावजूद केंद्र सरकार और संसद को शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक नीतिगत कदम उठाने चाहिए, ताकि लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों में व्याप्त असुरक्षा और असमंजस समाप्त हो सके।
सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति को मिले संरक्षण
जिला संगठन मंत्री सत्यार्थ पाराशरी ने मांग की कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत देते हुए उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सभी सेवा लाभों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर आरटीई अधिनियम में संशोधन या विशेष प्रावधान लाया जाए। जिला कोषाध्यक्ष परीक्षित गंगवार ने कहा कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाले शिक्षकों के अनुभव और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महासंघ ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि शिक्षकों के बीच बनी अनिश्चितता की स्थिति का शीघ्र समाधान हो सके।