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बीकानेर/जयपुर। राजस्थान की धरती से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने लाखों युवाओं के हौसले को नई उड़ान दी है। ट्रक ड्राइवर के बेटे Vikas Siyag ने आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और बार-बार की चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए RPSC RAS परीक्षा 2024 में 5वीं रैंक हासिल कर एक बार फिर टॉप-10 में जगह बनाई है। यह सिर्फ एक सफलता नहीं, बल्कि उस जज्बे की जीत है जो हर मुश्किल के सामने झुकने से इंकार करता है।

साधारण परिवार, बड़े सपनों की शुरुआत

विकास सियाग का सफर किसी बड़े शहर या समृद्ध परिवार से नहीं, बल्कि एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। उनके पिता ट्रक चालक हैं और साथ ही खेती-बाड़ी भी करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। सीमित आय और संघर्ष भरे माहौल में पले-बढ़े विकास के सामने शुरुआती दौर से ही कई मुश्किलें थीं। स्कूल की पढ़ाई भी पूरी तरह व्यवस्थित नहीं थी, क्योंकि कई बार शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती रही।

उधार के पैसों से पढ़ाई, फिर भी नहीं टूटा हौसला

विकास के जीवन का सबसे कठिन दौर वह था, जब पढ़ाई जारी रखने के लिए पैसे तक नहीं थे। 10वीं के बाद कोचिंग और आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें उधार पैसे लेने पड़े। परिवार ने किसी तरह पैसे का इंतजाम किया, ताकि बेटे का सपना अधूरा न रह जाए। इसी संघर्ष ने विकास के भीतर एक जिद पैदा कर दी—कुछ बड़ा करने की, परिवार की स्थिति बदलने की और खुद को साबित करने की।

नौकरी के साथ तैयारी, 8-9 घंटे की मेहनत

परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए विकास को 2018 में नौकरी भी करनी पड़ी। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। दिन में नौकरी और रात में पढ़ाई—यही उनकी दिनचर्या बन गई। उन्होंने राजस्थान सिविल सेवा परीक्षा के लिए रोजाना 8 से 9 घंटे पढ़ाई की। अप्रैल 2022 से उन्होंने पूरी तरह फोकस होकर तैयारी शुरू की और हर दिन खुद को बेहतर बनाने में जुटे रहे।

पहली असफलता, लेकिन नहीं टूटा आत्मविश्वास

हर सफलता के पीछे कई असफलताएं छिपी होती हैं, और विकास की कहानी भी इससे अलग नहीं है।
2022 में उन्होंने पहली बार RAS परीक्षा दी, लेकिन मेन्स में असफल हो गए। यह उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और पहले से ज्यादा मजबूत तैयारी के साथ दोबारा मैदान में उतरे।

दूसरे प्रयास में टॉप-10, फिर भी जारी रहा संघर्ष

2023 में अपने दूसरे प्रयास में विकास ने शानदार प्रदर्शन करते हुए RAS परीक्षा में टॉप-10 में जगह बनाई और उनका चयन SDM पद के लिए हुआ। यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उन्होंने यहीं रुकने का फैसला नहीं किया। उनका लक्ष्य और ऊंचा था, इसलिए उन्होंने एक बार फिर खुद को चुनौती दी।

2024 में फिर कमाल, 5वीं रैंक से चमके

2024 में विकास ने एक बार फिर RAS परीक्षा दी और इस बार उन्होंने राज्य में 5वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। लगातार दूसरी बार टॉप-10 में जगह बनाना उनकी मेहनत, अनुशासन और अटूट विश्वास का परिणाम है। उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता एक बार नहीं, बल्कि लगातार हासिल की जा सकती है।

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

विकास सियाग अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। उनका कहना है कि अगर परिवार का साथ और विश्वास न होता, तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था। उनके पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी, जबकि मां ने हर कदम पर हौसला बढ़ाया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी

विकास की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी या असफलता के डर से अपने सपनों को छोड़ देते हैं। उनका संदेश साफ है—अगर लक्ष्य के प्रति लगन और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती। आज विकास सियाग सिर्फ एक RAS टॉपर नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल बन चुके हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

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