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नई दिल्ली। देश की राजधानी में एक बड़ी आतंकी साजिश को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने वक्त रहते नाकाम कर दिया। सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित चार युवकों ने एक खतरनाक मॉड्यूल तैयार कर लिया था, जिसका निशाना देश के सबसे संवेदनशील स्थल—राम मंदिर, संसद और सैन्य प्रतिष्ठान—थे। पुलिस ने तीन राज्यों में एक साथ दबिश देकर इन चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से आईईडी बनाने का सामान भी बरामद किया गया है।

सोशल मीडिया बना कट्टरपंथ का अड्डा

खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू हुई जांच में सामने आया कि यह मॉड्यूल एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बने क्लोज्ड ग्रुप के जरिए संचालित हो रहा था। इस ग्रुप में लगातार ‘जिहाद’, ‘खिलाफत’ और ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे उग्र विचारों पर चर्चा की जाती थी और नए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बिना किसी सीधे संपर्क के यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा था, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

राम मंदिर और संसद पर थी नजर

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों की नजर देश के प्रमुख धार्मिक और संवेदनशील ठिकानों पर थी, जिनमें Ram Mandir Ayodhya और Indian Parliament जैसे स्थान शामिल थे। आरोपियों ने इन स्थानों को निशाना बनाने की रणनीति तैयार की थी और इसके लिए लगातार बातचीत भी की जा रही थी। यह साजिश कितनी गंभीर थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हमले के लिए तकनीकी तैयारी भी शुरू कर दी थी।

लाल किला-इंडिया गेट की रेकी से खुला राज

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शेख इमरान नाम का आरोपी दिसंबर 2025 में दिल्ली आया था और उसने Red Fort और India Gate जैसे अति संवेदनशील इलाकों की रेकी की थी। इतना ही नहीं, उसने सोशल मीडिया पर लाल किले की तस्वीर के साथ काले झंडे की एडिटेड फोटो पोस्ट कर माहौल भड़काने की भी कोशिश की थी, जिससे उसकी मंशा और नेटवर्क की गंभीरता साफ हो जाती है।

IED की तैयारी तक पहुंचा मॉड्यूल

पुलिस के अनुसार इस मॉड्यूल ने रिमोट कंट्रोल आईईडी तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया था। इसके लिए बाजार से आसानी से मिलने वाली चीजों जैसे खिलौना कार, बॉल बियरिंग, कील और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन सामग्रियों की तस्वीरें सोशल मीडिया ग्रुप में साझा की जाती थीं और फिर उन्हें एकत्र कर असेंबल करने की जिम्मेदारी एक आरोपी को सौंपी गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह नेटवर्क सिर्फ विचारों तक सीमित नहीं था, बल्कि जमीन पर हमले की तैयारी तक पहुंच चुका था।

फंडिंग और ट्रेनिंग का भी प्लान

पूरे मामले में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फंडिंग और ट्रेनिंग का प्लान भी तैयार कर रखा था। ग्रुप के सदस्यों को ओडिशा में हथियारों की ट्रेनिंग और शारीरिक अभ्यास कराने की बात कही गई थी। इसके लिए उनसे पैसे भी मांगे जा रहे थे, ताकि एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया जा सके। यह संकेत देता है कि यह साजिश लंबी योजना का हिस्सा थी, जिसमें धीरे-धीरे लोगों को जोड़कर बड़ा नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।

पुलिस की सतर्कता से टली बड़ी वारदात

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इस कार्रवाई को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगर यह मॉड्यूल सक्रिय हो जाता, तो देश के कई बड़े और संवेदनशील स्थानों पर गंभीर आतंकी घटना हो सकती थी। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के तार कहीं विदेशों से तो नहीं जुड़े हैं और क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं।

डिजिटल आतंकवाद बना नई चुनौती

यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह साबित करता है कि आज के दौर में आतंकवाद का चेहरा बदल चुका है। अब बंद कमरों में बैठकर, मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी खतरनाक साजिशें रची जा रही हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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