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तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने दावा किया है कि ईरानी सेना ने हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाला ईरान दुनिया का पहला देश बना है। हालांकि अमेरिका की ओर से अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अमेरिकी रिपोर्ट का हवाला देकर किया दावा

ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी संसद की रिसर्च संस्था कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि युद्ध के दौरान अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि संघर्ष में अमेरिका के कई सैन्य विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट ने ईरान के दावों की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में दोबारा युद्ध हुआ तो दुनिया को और “चौंकाने वाले नतीजे” देखने को मिल सकते हैं।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का भी जिक्र

रिपोर्ट में कथित तौर पर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम के सैन्य अभियान का जिक्र किया गया है। बताया गया कि यह अमेरिका और इजराइल का संयुक्त हवाई अभियान था, जो फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ चलाया गया था। इसी दौरान अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक F-35 गिराए जाने या कुल सैन्य नुकसान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि बेहद जरूरी होती है, क्योंकि युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए बड़े दावे करते हैं।

दुनिया की नजरें अमेरिका-ईरान तनाव पर

ईरान के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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