बरेली। बिजली निगम में नियमों को दरकिनार कर ट्यूलिप ग्रांड आवासीय परिसर के बिजली कनेक्शन में बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि 1317 किलोवाट क्षमता वाले इस हाईलोड कनेक्शन के लिए बिल्डर से निजी लाइन बनवाने के बाद भी अधिकारियों ने उसे बंद कर सरकारी नेटवर्क से जोड़ दिया। अब मामले का खुलासा होने पर विभागीय जांच बैठा दी गई है।

ट्यूलिप ग्रांड के लिए वर्ष 2015 में बिजली कनेक्शन स्वीकृत हुआ था। नियमानुसार बिल्डर ने अपने खर्चे पर सनसिटी विस्तार उपकेंद्र से करीब ढाई किलोमीटर लंबी स्वतंत्र लाइन तैयार कराई थी। लाइन निर्माण के सुपरविजन समेत अन्य शुल्क भी बिजली निगम ने वसूले थे। कई वर्षों तक इसी स्वतंत्र फीडर से बिजली आपूर्ति होती रही।

सरकारी लाइन पर डाल दिया भारी लोड

वर्ष 2022 में स्वतंत्र लाइन में तकनीकी समस्या आने पर उसकी मरम्मत के बजाय अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से ट्यूलिप ग्रांड की सप्लाई सीधे सनसिटी विस्तार के सार्वजनिक नेटवर्क से जोड़ दी। जबकि नियमों के अनुसार 500 किलोवाट से अधिक भार वाले कनेक्शनों के लिए अलग नेटवर्क होना अनिवार्य है। इसके बावजूद 1317 किलोवाट का भारी लोड सरकारी लाइन पर चलाया जाता रहा।

बंद लाइन से चोरी हुए तार और उपकरण

स्वतंत्र लाइन बंद होने के बाद उसका रखरखाव भी नहीं हुआ। इसका फायदा उठाकर चोर कई स्थानों से ओवरहेड लाइन के तार और अन्य उपकरण चोरी कर ले गए। उधर, भारी विद्युत भार लगातार सार्वजनिक फीडर पर चलता रहा।

शिकायत से खुली पोल, जांच के आदेश

हाल ही में ट्यूलिप ग्रांड रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी ने ट्रिपिंग और बिजली कटौती की शिकायत तत्कालीन मुख्य अभियंता से की थी। सोसायटी ने परिसर के विद्युत उपकरणों में खराबी बताते हुए सप्लाई को सिल्वर स्टेट फीडर से जोड़ने की मांग की थी। मामले की जांच के लिए अधिशासी अभियंता (11 केवी वर्टिकल) को मौके पर भेजा गया, जहां निरीक्षण के दौरान पूरा मामला सामने आ गया। इसके बाद विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

ट्यूलिप ग्रांड में बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायत मिली थी। जांच के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं। मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। धर्मेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता (नगर)

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