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नई दिल्ली/श्रीनगर। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल देखने को मिला। 22 अप्रैल की वह दर्दनाक घटना आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है, जब आतंकियों ने बेगुनाह सैलानियों को निशाना बनाकर गोलियों से छलनी कर दिया था। इस मौके पर ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना समेत कई देशों ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े होने का ऐलान किया।

बरसी पर छलका दर्द, फिर याद आए वो मासूम चेहरे

पहलगाम में हमले की बरसी पर स्थानीय लोगों, प्रशासन और सुरक्षा बलों ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मोमबत्तियां जलाकर उन मासूमों को याद किया गया, जो इस कायराना हमले का शिकार बने थे। एक साल बाद भी घटना का दर्द लोगों के चेहरों पर साफ नजर आया। लोगों ने कहा कि यह सिर्फ हमला नहीं था, बल्कि इंसानियत पर सीधा प्रहार था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

ऑस्ट्रेलिया बोला– आतंक के खिलाफ भारत के साथ

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन OAM ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया इस दुख की घड़ी में भारत के साथ खड़ा है और आतंकवाद के खिलाफ हर लड़ाई में भारत का समर्थन करता रहेगा। उनका यह बयान भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय समर्थन और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई को दर्शाता है।

अर्जेंटीना ने भी जताई एकजुटता

अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने भी इस हमले को याद करते हुए कहा कि यह घटना बेहद दुखद थी और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि अर्जेंटीना हर तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है और भारत के साथ खड़ा है।

कैसे हुआ था हमला, 26 लोगों की गई थी जान

22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाकर फायरिंग की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय पोनी चालक शामिल था। बताया गया कि पोनी चालक पर्यटकों को बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आतंकियों ने उसे भी गोली मार दी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

TRF और लश्कर-ए-तैयबा की साजिश उजागर

जांच में सामने आया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का हाथ था। आतंकियों ने सुनियोजित तरीके से इस हमले को अंजाम दिया था, जिससे कश्मीर में डर और अस्थिरता फैल सके।

भारत का करारा जवाब– ‘ऑपरेशन सिंदूर’

हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 और 8 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इस दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाकर बड़ी कार्रवाई की गई। सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में 9 आतंकी ठिकाने तबाह किए गए, जिससे आतंकियों के नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग भारत

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर पूरी तरह कायम है। भारत ने यह संदेश दिया कि किसी भी आतंकी हमले का जवाब अब कड़े और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा।

संकल्प का दिन: शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी

पहलगाम हमले की बरसी पर देश ने एक बार फिर यह संकल्प लिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। मारे गए लोगों की याद में देश आज भी भावुक है, लेकिन साथ ही यह भी तय है कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और आतंक के खिलाफ जंग और तेज होगी।

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