नई दिल्ली/सोल। बदलते युद्ध के स्वरूप में जहां ड्रोन, मिसाइल और लंबी दूरी के हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दक्षिण कोरिया अपनी सबसे भरोसेमंद तोप K9 थंडर को और ज्यादा घातक बनाने में जुट गया है। 155 मिमी की यह स्वचालित तोप अब लंबी दूरी, तेज फायरिंग और एडवांस सुरक्षा तकनीक के साथ अपग्रेड की जा रही है। खास बात यह है कि भारत, जो पहले ही इस तोप का बड़ा उपयोगकर्ता है, अब 200 नई K9 वज्र तोप खरीदने की तैयारी में दिख रहा है।
40 से 54 किमी तक मार, दुश्मन की सीमा के पार सटीक वार
K9 तोप के अपग्रेड का सबसे बड़ा पहलू इसकी मारक क्षमता को बढ़ाना है। अभी तक यह तोप करीब 40 किलोमीटर तक सटीक हमला कर सकती थी, लेकिन नए वर्जन में इसकी रेंज को बढ़ाकर लगभग 54 किलोमीटर तक ले जाने की तैयारी है। इसका मतलब है कि युद्ध के दौरान सेना दुश्मन की सीमा में काफी अंदर तक वार कर सकेगी, जबकि खुद सुरक्षित दूरी पर बनी रहेगी। यह क्षमता खासकर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ रणनीतिक बढ़त देने वाली मानी जा रही है।
नई तकनीक से लैस होगी ‘महाशक्तिशाली’ K9
दक्षिण कोरिया की कंपनी Hanwha Aerospace इस तोप के नए वर्जन K9A2 और K9A3 पर काम कर रही है। इसमें कई अत्याधुनिक बदलाव किए जा रहे हैं:
- फुली ऑटोलोडर सिस्टम, जिससे तेजी से गोले दागे जा सकेंगे
- एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम, जो लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाएगा
- 58 कैलिबर की लंबी गन, जिससे रेंज और ताकत दोनों बढ़ेगी
- लेजर बीम वार्निंग सिस्टम, जो दुश्मन के हमले का पहले ही अलर्ट देगा
- ड्रोन जैमर, जिससे दुश्मन के ड्रोन हमले को नाकाम किया जा सकेगा
- एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम, जो मिसाइल और रॉकेट हमलों से सुरक्षा देगा
इन तकनीकों के चलते K9 अब केवल हमला करने वाली तोप नहीं, बल्कि खुद को बचाने में भी सक्षम एक ‘स्मार्ट वॉर मशीन’ बनती जा रही है।
15 सेकंड में 3 गोले, कम क्रू में ज्यादा ताकत
K9 तोप की सबसे बड़ी ताकत इसकी फायरिंग स्पीड है। यह मात्र 15 सेकंड में 3 गोले दाग सकती है। एक गोले का वजन करीब 47 किलोग्राम होता है। नई तकनीक के बाद इसे ऑपरेट करने के लिए केवल 3 लोगों—कमांडर, गनर और ड्राइवर—की जरूरत होगी। इससे युद्ध के दौरान तेजी और दक्षता दोनों बढ़ेगी।
हर मौसम में कारगर, लद्दाख से रेगिस्तान तक तैनाती
K9 वज्र की खासियत यह भी है कि यह हर तरह के मौसम में काम कर सकती है। भारतीय सेना ने इसे लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान तक सफलतापूर्वक तैनात किया है। इससे यह साफ हो गया है कि यह तोप भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
भारत में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निर्माण
भारत में K9 वज्र तोप का निर्माण Larsen & Toubro द्वारा दक्षिण कोरिया के सहयोग से किया जा रहा है। यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक बड़ा उदाहरण है। अब भारत चाहता है कि आने वाले समय में इस तकनीक का और ज्यादा ट्रांसफर हो, ताकि देश में ही अत्याधुनिक हथियारों का डिजाइन और निर्माण किया जा सके।
200 नई तोपों की तैयारी, कुल संख्या 400 तक पहुंच सकती है
भारत पहले ही करीब 200 K9 वज्र तोपों का इस्तेमाल कर रहा है। अब रक्षा सूत्रों के अनुसार, दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत में 200 और तोपें खरीदने के संकेत मिले हैं। अगर यह डील पूरी होती है, तो भारतीय सेना के पास K9 तोपों की कुल संख्या 400 तक पहुंच जाएगी, जो उसे एशिया में सबसे ताकतवर आर्टिलरी फोर्स में शामिल कर देगी।
चीन-पाकिस्तान को जवाब देने की रणनीति
पाकिस्तान जहां चीन से लंबी दूरी की तोपें खरीद चुका है, वहीं चीन खुद भी अपनी आर्टिलरी को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत का K9 जैसे आधुनिक सिस्टम पर फोकस करना रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। K9 की बढ़ी हुई रेंज और सटीकता से भारतीय सेना दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हुए जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब दे सकेगी।
वैश्विक बाजार में दक्षिण कोरिया का दबदबा
K9 थंडर तोप का इस्तेमाल भारत समेत दुनिया के करीब 11 देश कर रहे हैं। इनमें पोलैंड, यूएई और कई नाटो देश शामिल हैं। पश्चिमी हथियारों पर निर्भरता कम करने के लिए कई देश अब दक्षिण कोरिया के हथियारों की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि दक्षिण कोरिया इस तोप को और उन्नत बनाकर वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
ड्रोन युद्ध के दौर में नई तैयारी
हाल के वर्षों में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदला है। यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक, ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ा है। ऐसे में K9 में ड्रोन जैमर और एडवांस डिफेंस सिस्टम जोड़ना एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे यह तोप न केवल हमला करेगी, बल्कि खुद को भी आधुनिक खतरों से सुरक्षित रख पाएगी।
भारत के लिए क्यों है गेमचेंजर?
K9 वज्र का अपग्रेडेड वर्जन भारतीय सेना के लिए कई मायनों में गेमचेंजर साबित हो सकता है:
- लंबी दूरी से दुश्मन पर सटीक हमला
- कम समय में ज्यादा फायरिंग क्षमता
- हर मौसम में ऑपरेशन की सुविधा
- ड्रोन और मिसाइल हमलों से सुरक्षा
- स्वदेशी निर्माण के जरिए आत्मनिर्भरता