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रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में बुलडोजर कार्रवाई की एक अलग तस्वीर सामने आई है। यहां प्रशासन के आदेश पर जब हाईवे चौड़ीकरण के लिए धार्मिक स्थलों को हटाने की नौबत आई, तो टकराव के बजाय सहमति का रास्ता चुना गया। बिलासपुर क्षेत्र में दरगाह प्रबंधन ने खुद आगे बढ़कर निर्माण हटाना शुरू कर दिया। यही वजह रही कि जहां आमतौर पर बुलडोजर एक्शन विवादों में घिरता है, वहीं रामपुर में यह कार्रवाई सहयोग और समझदारी की मिसाल बन गई।

7 किलोमीटर हाईवे चौड़ीकरण बना वजह

रामपुर शहर के भीतर से गुजर रहे करीब सात किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की योजना को शासन स्तर से मंजूरी मिल चुकी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस परियोजना पर काम भी शुरू कर दिया है।  सड़क चौड़ीकरण के दौरान कई स्थान ऐसे सामने आए, जहां निर्माण मार्ग में बाधा बन रहे थे। इनमें दो दरगाहों समेत तीन धार्मिक स्थल और कई दुकानें व व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे। प्रशासन ने इन सभी स्थानों को चिन्हित कर कार्रवाई की तैयारी की।

बातचीत से निकला समाधान, नहीं हुआ टकराव

प्रशासन ने सीधे कार्रवाई के बजाय पहले स्थानीय लोगों और दरगाह प्रबंधन से संवाद का रास्ता चुना। कई दौर की बातचीत के बाद आपसी सहमति बनी। मुतावल्ली और स्थानीय लोगों ने विकास कार्यों में बाधा न बनने का फैसला लिया। यही वजह रही कि जहां अन्य जगहों पर ऐसे मामलों में विरोध और तनाव देखने को मिलता है, वहीं रामपुर के बिलासपुर में लोगों ने खुद बुलडोजर बुलाकर निर्माण हटाना शुरू कर दिया।

हजरत शाह मियां की दरगाह पर खुद चला बुलडोजर

विशारदनगर स्थित हजरत शाह मियां की दरगाह इस कार्रवाई का सबसे बड़ा उदाहरण बनी। यहां के मुतावल्ली Nasim Khan Baba ने खुद आगे बढ़कर जेसीबी मशीन से चिन्हित हिस्से को हटवाना शुरू कराया। जैसे ही बुलडोजर चला, मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। राहगीर भी रुक-रुक कर इस अनोखे दृश्य को देखते रहे। कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, लेकिन माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण बना रहा। नासिम खान ने साफ कहा कि वे प्रशासन के अनुरोध पर यह कदम उठा रहे हैं, ताकि विकास कार्य में बाधा न आए।

जमीन के बदले जमीन की मांग

दरगाह प्रबंधन ने प्रशासन से बदले में जमीन देने की मांग भी रखी है। मुतावल्ली नासिम खान के अनुसार, उन्हें गाटा संख्या-253 में भूमि देने का आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन अपने वादे के अनुसार जमीन उपलब्ध कराता है और कब्जा दिलाता है, तो आगे की प्रक्रिया बिना किसी विवाद के पूरी हो जाएगी। यह मांग प्रशासन के सामने एक अहम शर्त के रूप में रखी गई है।

सादिक शाह मियां दरगाह का हिस्सा भी हटाया गया

इसी क्रम में ब्लॉक कार्यालय के सामने स्थित हजरत सादिक शाह मियां की दरगाह के पीछे के हिस्से को भी हटाया गया। यहां मजदूरों की मदद से निर्माण को तोड़ा गया। दरगाह के मुतावल्ली Zeeshan Khan ने बताया कि दरगाह को पीछे की ओर शिफ्ट किया जाएगा, ताकि सड़क चौड़ीकरण में कोई बाधा न आए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को केवल दरगाह ही नहीं, बल्कि जिन अन्य स्थानों पर लाल निशान लगाए गए हैं, वहां भी समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो।

प्रशासन ने मौके पर लिया जायजा

शाम के समय उपजिलाधिकारी Arun Kumar ने दोनों दरगाहों का निरीक्षण किया और मौके की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने दरगाह प्रबंधन से बातचीत कर पूरी प्रक्रिया को समझा। वहीं लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता Gurmeet Singh ने बताया कि दरगाह प्रबंधन द्वारा स्वयं निर्माण हटाने की सूचना मिली है। अब आगे की कार्रवाई को लेकर विभाग जल्द निर्णय लेगा।

विकास और आस्था के बीच संतुलन

रामपुर का यह मामला विकास और आस्था के बीच संतुलन का उदाहरण बनकर सामने आया है। जहां एक ओर सड़क चौड़ीकरण जैसी जरूरी परियोजना है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक आस्थाओं से जुड़े स्थल भी हैं। ऐसे में बिना किसी टकराव के सहमति से समाधान निकालना प्रशासन और समाज दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है।

आम लोगों ने भी दिखाई समझदारी 

स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का समर्थन किया। कई लोगों ने कहा कि अगर विकास कार्यों के लिए थोड़ी-बहुत कुर्बानी देनी पड़े, तो उससे पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। यह भी देखने को मिला कि लोग खुद मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग कर रहे थे।

सहमति की मिसाल बना रामपुर

रामपुर के बिलासपुर में जो हुआ, वह आम बुलडोजर कार्रवाई से अलग कहानी कहता है। यहां न तो विरोध हुआ, न ही तनाव। बल्कि लोगों ने खुद आगे बढ़कर विकास के रास्ते को साफ किया। यह घटना बताती है कि अगर प्रशासन संवाद और विश्वास के साथ काम करे, तो बड़े से बड़ा विवाद भी आसानी से सुलझाया जा सकता है।

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