गोरखपुर। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने सियासी हलचल तेज कर दी है। जिले की 9 विधानसभा सीटों से करीब 6 लाख 45 हजार वोटरों के नाम कटने के बाद अब हर दल अपने-अपने हिसाब से जीत-हार का गणित बैठाने में जुट गया है।
9 सीटों पर भाजपा का कब्जा, खतरे में बढ़त?
गोरखपुर की सभी 9 विधानसभा सीटों पर इस समय भाजपा के विधायक काबिज हैं। इनमें सबसे अहम सीट गोरखपुर सदर है, जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधायक हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सदर सीट पर असर कम दिखेगा, लेकिन बाकी 8 सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं। बड़े पैमाने पर वोट कटने से चुनावी बढ़त पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
‘निष्क्रिय और डुप्लीकेट वोटर हटे’
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में ज्यादातर ऐसे वोटर हटे हैं जो या तो मतदान में निष्क्रिय थे या जिनके नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज थे। पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत 58-60% के आसपास ही रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में निष्क्रिय मतदाता सूची में शामिल थे।
भाजपा समर्थकों पर असर की चर्चा
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के समर्थक मतदान में अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहते हैं, जबकि विपक्षी दलों के वोटर ज्यादा सक्रिय रहते हैं। ऐसे में यदि कटे वोटों में भाजपा समर्थकों की संख्या ज्यादा हुई तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
विपक्ष का आरोप: ‘साजिश के तहत कटे वोट’
कांग्रेस नेता अनिल सोनकर ने इसे भाजपा की सुनियोजित साजिश बताया। उनका आरोप है कि जिन इलाकों से भाजपा को कम वोट मिलते हैं, वहीं से मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सपा प्रवक्ता कीर्ति निधि पांडेय ने भी फर्जी आवेदन देकर वोट कटवाने की जांच की मांग की है और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
भाजपा का जवाब: ‘कोई असर नहीं पड़ेगा’
भाजपा नेता प्रेमनाथ शुक्ल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह वैध है। उनके अनुसार, जिनके नाम कटे हैं वे या तो फर्जी, मृतक या स्थानांतरित मतदाता थे और इससे पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
2027 में तय होगा असली असर
फिलहाल गोरखपुर में वोट कटने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में यह बदलाव किस पार्टी के पक्ष में जाता है और किसके लिए नुकसान का कारण बनता है।