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मथुरा। धर्मनगरी वृंदावन के केसी घाट पर शुक्रवार दोपहर यमुना में नाव पलटने से दर्दनाक हादसा हो गया। अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं। सबसे बड़ा सदमा पंजाब के लुधियाना के एक ही परिवार को लगा, जिसने अपने 7 सदस्यों को इस हादसे में खो दिया।

एक ही परिवार उजड़ा, लुधियाना में मातम

हादसे में लुधियाना के जगराओं से आए एक ही परिवार के 7 लोग काल के गाल में समा गए। मृतकों में मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा शामिल हैं। चार दिन की धार्मिक यात्रा पर आए इस परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 22 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 4 लोगों की तलाश जारी है। सेना, NDRF और SDRF की टीमें 14 किलोमीटर के दायरे में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

कैसे पलटी मौत की नाव

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे नाव जुगल घाट से रवाना हुई थी। तेज हवा (करीब 40 किमी/घंटा) के कारण नाव डगमगाने लगी। आगे पीपा पुल से बचाने की कोशिश में नाव दो बार टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार जोरदार टक्कर के बाद 25 फीट गहरे पानी में पलट गई।

न लाइफ जैकेट, न सुरक्षा इंतजाम

जांच में सामने आया कि नाव में सवार श्रद्धालुओं को लाइफ जैकेट तक नहीं दी गई थी। नाविक पप्पू निषाद हादसे के बाद फरार हो गया था, जिसे देर रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी सामने आई है।

रेस्क्यू में चुनौती: तेज बहाव और कीचड़

रेस्क्यू टीम के सामने यमुना का तेज बहाव सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, नदी की तलहटी में गाद और कीचड़ के कारण शवों के दबे होने की आशंका है। 24 घंटे बाद शव पानी की सतह पर आने की संभावना जताई जा रही है।

250 जवान, 13 बोट… दिन-रात तलाश जारी

रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना, NDRF, SDRF और PAC समेत करीब 250 लोग जुटे हैं। 8 बोट NDRF और 5 बोट SDRF की लगाई गई हैं। स्थानीय गोताखोरों की भी मदद ली जा रही है ताकि लापता लोगों का जल्द पता लगाया जा सके।

प्रशासन अलर्ट, आंकड़ों का मिलान जारी

प्रशासन लगातार लापता लोगों की संख्या का मिलान कर रहा है। एसपी ग्रामीण के अनुसार, हर पहलू की जांच की जा रही है और सर्च ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता।

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