नई दिल्ली। इंटरनेट पर पहचान छिपाकर गतिविधियां करने और प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म तक पहुंच बनाने में इस्तेमाल होने वाले वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) पर केंद्र सरकार जल्द सख्ती बढ़ा सकती है। सरकार ऐसे नए नियम लाने की तैयारी में है, जिनके तहत भारत में सेवाएं देने वाली VPN कंपनियों को देश में अपना कार्यालय खोलना, स्थानीय अधिकारी नियुक्त करना और उपभोक्ताओं का डेटा निर्धारित नियमों के अनुसार सुरक्षित रखना पड़ सकता है। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों और उनके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी किया जा सकता है।
2022 के नियमों का नहीं मिला अपेक्षित असर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने VPN कंपनियों को अपने ग्राहकों का डेटा रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया था। हालांकि कई बड़ी VPN कंपनियों ने भारत से अपने फिजिकल सर्वर हटाकर भारतीय यूजर्स का ट्रैफिक दूसरे देशों, जैसे सिंगापुर, के जरिए संचालित करना शुरू कर दिया। इससे जांच एजेंसियों को आवश्यक जानकारी हासिल करने में कठिनाई होने लगी।
बैन के बाद भी चल रहे प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म
सरकार का मानना है कि VPN के जरिए कई बार प्रतिबंधित वेबसाइट, ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक आसानी से पहुंच बनाई जाती है। हाल के कुछ मामलों में प्रतिबंध के बावजूद यूजर्स द्वारा VPN के माध्यम से सेवाओं का उपयोग किए जाने की बात सामने आई है। इससे सरकारी प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो जाता है।
साइबर अपराध और परीक्षा में भी हुआ दुरुपयोग
रिपोर्टों के मुताबिक, VPN का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी, फर्जी अकाउंट संचालन और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों में भी किया गया है। हाल ही में नीट परीक्षा से पहले राजस्थान के भीलवाड़ा में एक छात्र पर फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर टेलीग्राम के जरिए फैलाने का आरोप लगा था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने VPN का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी।
नए नियमों में क्या हो सकते हैं प्रावधान?
- भारत में सेवाएं देने वाली VPN कंपनियों के लिए देश में कार्यालय खोलना अनिवार्य किया जा सकता है।
- कंपनियों को भारत में कंप्लायंस या नोडल अधिकारी नियुक्त करना पड़ सकता है।
- जांच एजेंसियों के साथ सहयोग और आवश्यक डेटा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
- नियमों का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान किया जा सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से इन प्रस्तावित नियमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस दिशा में मसौदे पर विचार किया जा रहा है।