बरेली। सीबीगंज स्थित सुपीरियर शराब फैक्ट्री में कन्वेयर बेल्ट में फंसकर मजदूर सत्यपाल सागर की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मृतक के बेटे गौतम कुमार की तहरीर पर सीबीगंज पुलिस ने फैक्ट्री के प्रबंधक, एचआर, सुपरवाइजर और लोडर चालक समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है, जिसे दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया।

परिजनों के मुताबिक, धीरपुर निवासी सत्यपाल सागर कई महीनों से सुपीरियर इंडस्ट्रीज के बॉयलर सेक्शन में भूसी झोंकने का काम कर रहे थे। 15 जुलाई की दोपहर परिवार को फैक्ट्री से फोन कर उनकी मौत की सूचना दी गई। बेटा गौतम जब फैक्ट्री पहुंचा तो पिता को अस्पताल ले जाने की बात कही गई, लेकिन कुछ देर बाद एंबुलेंस में उनका शव वापस लाया गया।

एक लाख रुपये ले लो, कार्रवाई मत करो

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि जब परिवार ने मौत का कारण पूछा तो फैक्ट्री के एचआर ने बताया कि सत्यपाल भूसी के टैंक में गिर गए थे। इसके बाद कथित तौर पर परिवार को एक लाख रुपये नकद और मृतक की पत्नी को आजीवन पेंशन दिलाने का प्रस्ताव देकर कानूनी कार्रवाई न करने का दबाव बनाया गया। मृतक के बेटे का आरोप है कि परिवार ने घटना की सच्चाई जानने के लिए फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाने की मांग की, लेकिन प्रबंधन ने फुटेज दिखाने से इनकार कर दिया और उन्हें फैक्ट्री परिसर से बाहर निकलवा दिया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने तहरीर देने की सलाह दी।

साजिश के तहत हत्या का आरोप

गौतम कुमार ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ थे। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा सीसीटीवी फुटेज छिपाने और घटनाक्रम को लेकर मिली जानकारी के आधार पर उन्हें आशंका है कि एचआर, सुपरवाइजर, प्रबंधक और लोडर चालक ने साजिश के तहत उनके पिता की हत्या की है। इसी आधार पर कार्रवाई की मांग की गई। सीबीगंज पुलिस ने मृतक के बेटे गौतम कुमार की तहरीर के आधार पर फैक्ट्री के प्रबंधक, एचआर, सुपरवाइजर और लोडर चालक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीगंज इंस्पेक्टर विनोद सिंह का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी जा चुकी है मजदूर की जान

गौरतलब है कि करीब दो वर्ष पहले भी इसी सुपीरियर इंडस्ट्रीज में कार्यरत मजदूर ताराचंद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उस समय भी परिजनों ने फैक्ट्री गेट पर शव रखकर प्रदर्शन किया था। लगातार दूसरी मौत के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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