बरेली। शहर को जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्तावित पीलीभीत बाइपास को आठ लेन में विस्तारित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना फिलहाल ठप हो गई है। तकनीकी कारणों के चलते लगभग 115 करोड़ रुपये की इस योजना का टेंडर निरस्त कर दिया गया है। 30 जुलाई को खुलने वाली निविदा रद्द होने के बाद अब पूरी परियोजना पुनः सर्वे और दस्तावेजी प्रक्रिया के चरण में पहुंच गई है।
7.40 किलोमीटर सड़क का नया खाका तैयार होगा
बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की संयुक्त टीमें त्रिशूल तिराहे से सेटेलाइट बस अड्डे तक लगभग 7.40 किलोमीटर लंबे मार्ग का पुनः सर्वे कर रही हैं। सर्वे पूरा होने के बाद संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सर्विस लेन और आरसीसी ड्रेन के डिजाइन में संशोधन प्रस्तावित
आठ लेन सड़क के साथ दोनों ओर सर्विस लेन और आरसीसी ड्रेन के निर्माण की योजना प्रस्तावित है। ड्रेन के भीतर बिजली और संचार की भूमिगत केबल बिछाने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि भविष्य में सड़क को बार-बार खोदने की आवश्यकता न पड़े। टेंडर निरस्त होने के बाद अब ड्रेन, इंटरलॉकिंग और सर्विस लेन के डिजाइन की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
डीपीआर में स्पष्ट होंगे विभागीय दायित्व
पूर्व में पीडब्ल्यूडी और बीडीए के बीच कार्य विभाजन को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए गए थे, जिसमें सड़क निर्माण की जिम्मेदारी बीडीए और ड्रेन एवं सर्विस लेन का कार्य पीडब्ल्यूडी को सौंपने पर विचार किया गया था। अब संशोधित डीपीआर में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा कि किस विभाग को कौन-सा कार्य सौंपा जाएगा।
अधिकारियों का बयान: सर्वे के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
बीडीए के सहायक अभियंता संदीप कुमार ने बताया कि तकनीकी कारणों से टेंडर निरस्त किया गया है। उन्होंने कहा, “फिलहाल संयुक्त सर्वे जारी है। आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संशोधित डीपीआर में सभी आवश्यक पहलुओं को शामिल किया जाएगा। उच्चाधिकारियों की स्वीकृति के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।”
जाम से राहत की उम्मीद को झटका
पीलीभीत बाइपास पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक के बीच इस परियोजना के विलंबित होने से लोगों को अभी और प्रतीक्षा करनी होगी। वर्तमान में सेटेलाइट से बड़ा बाइपास तक लगभग 12 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 45 मिनट का समय लग रहा है, जबकि सेटेलाइट बस अड्डा शहर के सबसे अधिक जाम वाले क्षेत्रों में शामिल है।
डिजाइन, लागत और अवरोधों की होगी पुनः समीक्षा
टेंडर निरस्त होने के बाद अब परियोजना के डिजाइन, अनुमानित लागत और भूमि उपलब्धता की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। मार्ग में आने वाले पेड़, बिजली के खंभे और अन्य अवरोधों को भी चिन्हित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो।