बुलंदशहर। रामघाट थाने में जब्त वाहन को कथित तौर पर बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के थाने से बाहर ले जाने और बाद में उससे हुई दुर्घटना के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने डीजीपी को पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया है।
शराब बरामदगी के बाद जब्त हुआ था वाहन
रामघाट पुलिस ने 16 अप्रैल 2021 को एक वाहन जब्त किया था। पुलिस के अनुसार वाहन से 16 पेटी शराब बरामद हुई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चार जून को तत्कालीन सिपाही पंकज राणा, नरेंद्र सिंह और हेड मोहर्रिर सीताराम उक्त जब्त वाहन से दबिश देने गए थे। इसके तीन दिन बाद सात जून को मथुरा के राया क्षेत्र में इसी वाहन से हुई दुर्घटना में एक महिला की मौत हो गई।
वाहन स्वामी ने हाईकोर्ट में रखा पक्ष
मामले में वाहन स्वामी के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति बनने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में जब्त वाहन को पुलिसकर्मियों द्वारा थाने से बाहर ले जाने समेत पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया गया। कोर्ट के जवाब तलब करने पर पुलिस की ओर से तत्कालीन पुलिसकर्मियों की लापरवाही का उल्लेख किया गया।
एफआईआर न होने पर कोर्ट ने मांगा जवाब
पुलिस के जवाब पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि जब्त वाहन को बिना वैधानिक प्रक्रिया के थाने से बाहर ले जाया गया, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर विचार क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं। डीजीपी को गोपनीय जांच कर आठ सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच के बाद ही संबंधित पुलिसकर्मियों और तत्कालीन थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।