बरेली। उत्तराखंड में 70 लाख रुपये की अफीम की खेप पहुंचाने की साजिश रच रहे झारखंड के तस्कर विशाल कुमार को अदालत से कोई राहत नहीं मिली। 13 किलो अफीम के साथ गिरफ्तार किए गए आरोपी की जमानत अर्जी फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
मामला 16 मई का है। देवरनिया पुलिस और बरेली की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नैनीताल फोरलेन पर बिचपुरी स्थित ताज भट्ठे जाने वाले मार्ग के पास घेराबंदी कर दो युवकों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उनकी पहचान विशाल कुमार निवासी बरिसाखी, थाना गिद्धौर, जिला चतरा (झारखंड) और अजय कुमार निवासी तेतरिया, थाना पथलगड़ा, जिला चतरा (झारखंड) के रूप में हुई थी।
13 किलो अफीम, मोबाइल और नकदी बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से 13 किलो अफीम, दो मोबाइल फोन और 555 रुपये नकद बरामद किए थे। बरामद अफीम की कीमत करीब 70 लाख रुपये आंकी गई थी। पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया था कि वे अफीम की यह खेप उत्तराखंड में सप्लाई करने जा रहे थे।
मोबाइल से मिले नेटवर्क के सुराग, गिरोह की तलाश जारी
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध संपर्क मिले हैं। पुलिस इन नंबरों की पड़ताल कर रही है और पूरे गिरोह के सरगना समेत अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने खारिज की जमानत
इसी मामले में आरोपी विशाल कुमार ने अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान एडीजीसी क्राइम संतोष श्रीवास्तव ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अपराध की गंभीरता और बरामदगी का हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश राघवेंद्र मणि ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत के आदेश के बाद आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेगा, जबकि पुलिस पूरे अफीम तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।