बरेली। कथित 100 करोड़ रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मोबाइल कारोबारी आशुतोष अग्रवाल पर ईडी का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मंगलवार सुबह शुरू हुई छापेमारी देर रात करीब 12 बजे तक चली, लेकिन जांच यहीं नहीं रुकी। बुधवार सुबह छह बजे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम फिर मारवाड़ीगंज स्थित आवास पर पहुंची और जांच का दूसरा दौर शुरू कर दिया। लगातार दूसरे दिन चली कार्रवाई ने व्यापारिक जगत में हलचल और चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
मारवाड़ीगंज स्थित आवासीय परिसर के भीतर ही आशुतोष अग्रवाल का कार्यालय और गोदाम संचालित होता है। इसी वजह से जांच एजेंसी को एक ही स्थान पर बड़ी मात्रा में कारोबारी रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और वित्तीय दस्तावेज मिले हैं। छापेमारी के दौरान टीम ने कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खंगाला। सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर उनकी गहन जांच शुरू कर दी है। देर रात तक चली पड़ताल में यह समझने की कोशिश की गई कि कारोबार के नाम पर फर्जी कंपनियों का नेटवर्क किस तरह संचालित किया गया।
GST इनपुट टैक्स क्रेडिट के खेल पर फोकस
जांच का सबसे अहम बिंदु कथित तौर पर जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं कागजी कंपनियों और फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपये का टैक्स लाभ तो नहीं लिया गया। एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन की परत-दर-परत जांच कर रही है और धन के वास्तविक स्रोत व उपयोग की जानकारी जुटा रही है।
बड़ी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर भी नजर
आशुतोष अग्रवाल केवल मोबाइल कारोबार तक सीमित नहीं हैं। वे हिंदुस्तान लीवर, आईटीसी और कैडबरी जैसी बड़ी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर, स्टॉकिस्ट और कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) एजेंट के रूप में भी कार्यरत हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि बड़े कारोबारी नेटवर्क की आड़ में कागजी कंपनियों का जाल बिछाकर धन के लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसी वजह से ईडी विभिन्न कंपनियों के साथ कारोबारी संबंधों और वित्तीय प्रवाह की बारीकी से जांच कर रही है।
राउंड-ट्रिपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच
सूत्रों के मुताबिक एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि कथित फर्जीवाड़े से हासिल धन किन व्यक्तियों, फर्मों या संस्थाओं तक पहुंचा। क्या रकम को राउंड-ट्रिपिंग के जरिए दोबारा सिस्टम में वापस लाया गया और उसे वैध कारोबारी आय का स्वरूप दिया गया, इस पहलू पर भी विशेष फोकस है। बैंक खातों, निवेश, संपत्तियों और बड़े वित्तीय सौदों की जानकारी जुटाकर धन के पूरे ट्रेल को खंगाला जा रहा है। कार्रवाई के दौरान कार्यालय और गोदाम से जुड़े कर्मचारी, सेल्समैन और पल्लेदार सुबह से ही परिसर के बाहर पहुंचते रहे, लेकिन सुरक्षा कारणों से किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। कई कर्मचारी घंटों बाहर खड़े होकर इंतजार करते रहे। वहीं कारोबारी के परिचित और व्यापारिक साझेदार भी पूरे दिन कार्रवाई की जानकारी जुटाने में लगे रहे।
हवाला कनेक्शन की चर्चा से बढ़ी हलचल
हाल ही में पुलिस ने हवाला नेटवर्क से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा किया था। ऐसे में जब ईडी की टीम पुलिस बल के साथ मारवाड़ीगंज पहुंची तो लोगों को शुरुआत में लगा कि कार्रवाई उसी मामले से जुड़ी है। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि जांच का केंद्र आशुतोष अग्रवाल का कारोबारी नेटवर्क और कथित जीएसटी फर्जीवाड़ा है। लगातार दूसरे दिन चली कार्रवाई से संकेत मिल रहे हैं कि ईडी इस पूरे मामले में गहराई तक पहुंचकर वित्तीय नेटवर्क की हर कड़ी को खंगालने में जुटी हुई है।