बरेली। क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) खरीदने के नाम पर साइबर ठगी का एक अनोखा मामला सामने आया है। ठग ने व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए पीड़ित को झांसे में लेकर ट्रस्ट वॉलेट से 498 यूएसडीटी पार कर दिए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने सूझबूझ दिखाते हुए आरोपी को बरेली बुलाया और लोगों की मदद से पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, लेकिन पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध में समझौता मान्य नहीं है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

बहेड़ी के गांव सिमरा निवासी जीशान हाशमी ने पुलिस को बताया कि पांच अगस्त को एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए उनसे संपर्क किया। उसने क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) खरीदने की इच्छा जताई और एक क्यूआर कोड भेजकर एक यूएसडीटी ट्रांसफर करने को कहा। जैसे ही जीशान ने अपने ट्रस्ट वॉलेट से क्यूआर कोड स्कैन किया, उनके वॉलेट में मौजूद सभी 498 यूएसडीटी गायब हो गए।

दूसरी डील का झांसा देकर बुलाया, मौके पर पकड़वाया

ठगी का एहसास होने पर जीशान ने आरोपी से संपर्क किया और बताया कि उनके पास अभी और भी यूएसडीटी हैं, जिन्हें वह खरीद सकता है। इस झांसे में आकर बारादरी थाना क्षेत्र की सिंधुनगर कॉलोनी निवासी सौरभ उनसे मिलने पहुंच गया। जैसे ही उसने बाकी यूएसडीटी ट्रांसफर करने को कहा, पीड़ित ने स्थानीय लोगों की मदद से उसे पकड़ लिया और 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सौंप दिया।

समझौते के बावजूद होगी कानूनी कार्रवाई

पुलिस आरोपी को इज्जतनगर थाने ले गई, जहां उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित की क्रिप्टो करेंसी वापस कर दी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। इज्जतनगर थाना प्रभारी निरीक्षक सुरेश चंद्र गौतम ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया है, लेकिन साइबर फ्रॉड जैसे मामलों में समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपी को नोटिस तामील कराया गया है और उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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