टोक्यो। पूर्वी एशिया में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। चीन और रूस के परमाणु क्षमता वाले रणनीतिक बमवर्षकों ने दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और जापान सागर के ऊपर संयुक्त हवाई गश्त की। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य विमान जापान और दक्षिण कोरिया के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में भी दाखिल हुए, जिसके बाद दोनों देशों ने तत्काल अपने लड़ाकू विमान तैनात कर दिए।
चीन ने संयुक्त गश्त की आधिकारिक पुष्टि की
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स ने संयुक्त गश्त की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अभियान क्षेत्रीय शांति और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, 2019 के बाद यह चीन और रूस का 11वां संयुक्त हवाई गश्त अभियान है, जबकि वर्ष 2026 का यह पहला संयुक्त मिशन रहा।
जापान ने जारी किया उड़ान मार्ग, कई लड़ाकू विमान भी थे साथ
जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीनी H-6 रणनीतिक बमवर्षक और रूसी Tu-95 बमवर्षक विमानों के साथ चीनी J-16 लड़ाकू विमान, रूसी Tu-142 समुद्री गश्ती विमान और Su-30 फाइटर जेट भी उड़ान में शामिल थे। कुछ सैन्य विमान ओकिनावा और मियाको द्वीप के बीच स्थित रणनीतिक मियाको जलडमरूमध्य से भी होकर गुजरे, जिस पर जापान ने कड़ी निगरानी रखी।
KADIZ में घुसपैठ पर दक्षिण कोरिया ने उड़ाए फाइटर जेट
उधर, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चीन और रूस के करीब 10 सैन्य विमान कुछ समय के लिए कोरियाई एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (KADIZ) में दाखिल हुए। हालांकि, दक्षिण कोरियाई वायुसेना ने पहले ही इन विमानों की पहचान कर ली थी और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए फाइटर जेट तत्काल रवाना कर दिए।
चीन और रूस के राजनयिकों को तलब कर जताया कड़ा विरोध
घटना के बाद दक्षिण कोरिया ने चीन और रूस के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। सोल स्थित दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।
बढ़ती सैन्य साझेदारी से पूर्वी एशिया में गहराया तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में चीन और रूस के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी पूर्वी एशिया में सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना रही है। दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त हवाई और नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं, जिससे जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की रणनीतिक चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।