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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सीजफायर की कवायद के बीच भारत ने बड़ी कूटनीतिक चाल चलते हुए खाड़ी के 6 अहम देशों को एक मंच पर साध लिया है। इस पहल में होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी भारत ने अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के संकेत दिए हैं।

GCC देशों से सीधी बातचीत, भारत का बड़ा संदेश

भारत ने Gulf Cooperation Council (GCC) के सदस्य देशों—Saudi Arabia, Qatar, Kuwait, Bahrain, United Arab Emirates और Oman—के साथ सक्रिय संपर्क साधा है। वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने सभी देशों को भारत के समर्थन और साझेदारी का भरोसा दिलाया।

सप्लाई चेन पर संकट, भारत ने दिया भरोसा

भारत ने साफ किया कि अगर पश्चिम एशिया संकट के कारण खाद्य और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो वह खाड़ी देशों के साथ मिलकर समाधान निकालने में हर संभव मदद करेगा। यह कदम भारत की ‘संकट में साझेदारी’ वाली नीति को मजबूत करता है। Piyush Goyal ने GCC के महासचिव जासेम मोहम्मद अल बुदैवी से बातचीत में उम्मीद जताई कि मौजूदा युद्धविराम स्थायी शांति और स्थिरता का रास्ता खोलेगा। भारत ने यूएई, बहरीन और कुवैत से अलग-अलग भी बातचीत कर रणनीतिक संवाद को और मजबूत किया।

तेल-गैस सप्लाई और FTA पर भी फोकस

खाड़ी देश भारत के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायर हैं, ऐसे में इस समूह के साथ रिश्ते बेहद अहम हैं। इसी के साथ भारत और GCC के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर भी बातचीत जारी है, जो आने वाले समय में आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। पश्चिम एशिया संकट के बीच Strait of Hormuz पर नियंत्रण सबसे बड़ा चिंता का विषय बना हुआ है। Iran के नियंत्रण के चलते तेल सप्लाई और व्यापारिक मार्गों पर असर पड़ा है, जिससे भारत और खाड़ी देश दोनों प्रभावित हैं।

ओमान की भूमिका से बदला समीकरण

Oman की GCC सदस्यता इस समय खास मायने रखती है, क्योंकि ईरान होर्मुज को लेकर ओमान को साथ लेकर चलने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में भारत का सभी देशों को एक मंच पर लाना एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।

लगातार एक्टिव भारत: एक के बाद एक दौरे

इस कूटनीतिक सक्रियता के तहत Hardeep Singh Puri कतर दौरे पर गए, जबकि S. Jaishankar यूएई यात्रा पर हैं। यह साफ संकेत है कि भारत इस संकट के बीच अपनी भूमिका को और मजबूत करने में जुटा है। सीजफायर की चर्चा के बीच भारत ने खाड़ी देशों के साथ तालमेल बढ़ाकर यह दिखा दिया है कि वह सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक संतुलन में सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है।

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