बरेली। रामगंगा नगर आवासीय योजना में वर्षों से अधर में लटकी कन्वेंशन सेंटर परियोजना पर आखिरकार बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने सख्त कार्रवाई कर दी। निर्माण कार्य में लगातार देरी, चेतावनियों और जुर्माने के बावजूद प्रगति न होने पर बीडीए ने कार्यदायी संस्था सत्य साईं बिल्डर्स एंड कांट्रेक्टर को डिबार कर दिया है। साथ ही साफ चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र निर्माण पूरा नहीं किया गया तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया जाएगा।
आठ बार मिला एक्सटेंशन, फिर भी नहीं पूरा हुआ काम
रामगंगा नगर आवासीय योजना के सेक्टर-8 में वर्ष 2022 से करीब 29 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना को जून-2025 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। बीडीए ने कार्यदायी संस्था को आठ बार कार्य विस्तार दिया, लेकिन जनवरी-2026 की अंतिम समयसीमा भी बेअसर साबित हुई।
पांच बार जुर्माना और नोटिस, फिर भी नहीं सुधरी रफ्तार
बीडीए उपाध्यक्ष के अनुसार निर्माण कार्य में लगातार देरी को लेकर एजेंसी को पांच बार जुर्माना लगाया गया और कई चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए। इसके बावजूद निर्माण की गति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। मई-2026 तक भी परियोजना अधूरी रहने पर प्राधिकरण ने कठोर रुख अपनाते हुए संस्था को डिबार कर दिया।
करोड़ों की परियोजना में मिलनी हैं आधुनिक सुविधाएं
निर्माणाधीन कन्वेंशन सेंटर में स्वीमिंग पूल, 200 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम, 20 अतिथि कक्ष, 300 वाहनों की पार्किंग, विशाल लॉन एरिया, किचन और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यह परियोजना रामगंगा नगर क्षेत्र की प्रमुख विकास योजनाओं में शामिल है।
अब अन्य टेंडरों से भी बाहर होगी एजेंसी
डिबार किए जाने के बाद सत्य साईं बिल्डर्स एंड कांट्रेक्टर बीडीए की किसी भी नई निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगी। बीडीए उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में लापरवाही करने वाली एजेंसियों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर ब्लैकलिस्ट जैसी कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।
विकास कार्यों में मनमानी पर BDA का सख्त संदेश
कन्वेंशन सेंटर प्रकरण को बीडीए प्रशासन का बड़ा अनुशासनात्मक कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण ने संकेत दे दिया है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी और लापरवाही अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।