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नई दिल्ली। बदलते वैश्विक हालात और सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना ने अपनी रणनीति को नए सिरे से ढालना शुरू कर दिया है। सेना प्रमुख General Upendra Dwivedi ने साफ कहा है कि चीन और पाकिस्तान की ओर से परमाणु खतरा अब केवल आशंका नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुका है। ऐसे में भारतीय सेना हर स्तर पर अपनी तैयारी को मजबूत कर रही है।

‘परमाणु खतरे पर चर्चा अब अनिवार्य’

‘रण संवाद’ कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों सीमाओं पर मौजूद परमाणु खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए अब सेना के भीतर रणनीतिक चर्चाओं का दायरा बढ़ाया गया है। पहले जहां यह चर्चा सिर्फ शीर्ष स्तर तक सीमित थी, अब इसे कोर कमांडर और सेना कमांडर स्तर तक विस्तार दिया गया है।

रणनीति में बड़ा बदलाव, नीचे तक पहुंची तैयारी

सेना ने अब अपनी तैयारी को सिर्फ उच्च स्तर तक सीमित नहीं रखा है। लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी भी अब परमाणु खतरे से जुड़े युद्ध अभ्यासों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर तैनात कमांडरों को भी संभावित खतरों की प्रत्यक्ष समझ मिल रही है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो रही है। सेना प्रमुख ने कहा कि आज का युद्ध पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। अब युद्ध एक साथ कई मोर्चों पर लड़ा जाता है—जमीन, आसमान, समुद्र, साइबर स्पेस और अंतरिक्ष तक। ऐसे में किसी भी सैन्य कमांडर के लिए जरूरी है कि वह हर डोमेन की समझ रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब गोलीबारी के साथ-साथ साइबर हमले, संचार तंत्र को बाधित करना और अंतरिक्ष से निगरानी जैसे नए आयाम भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। इसीलिए सेना को ‘मल्टी-डोमेन वॉरफेयर’ के लिए तैयार किया जा रहा है।

आत्मनिर्भरता पर फोकस, तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल

भारतीय सेना अब हथियारों और सैन्य उपकरणों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। ड्रोन यूनिट, साइबर वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी इकाइयों को मजबूत किया जा रहा है। नई तकनीकों को शामिल कर सेना को ज्यादा प्रभावी और तेज प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार किया जा रहा है। सेना प्रमुख ने यह भी माना कि आज का सबसे बड़ा खतरा ‘हाइब्रिड वॉर’ है, जिसमें दुश्मन सीधे हमला नहीं करता, बल्कि साइबर, सूचना और आर्थिक तरीकों से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है। इस तरह के युद्ध से निपटने के लिए सेना को अलग रणनीति अपनानी होगी।

तालमेल सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि इन बदलावों के बीच सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग इकाइयों और डोमेन के बीच तालमेल बनाना है। सेना अब इस दिशा में भी काम कर रही है ताकि हर स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में सेना को अपनी रणनीति और मजबूत करनी होगी। संसाधनों का सही वितरण, कमांड स्ट्रक्चर को नीचे तक सशक्त बनाना और हर स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का इस्तेमाल कितना भी बढ़ जाए, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसान के हाथ में ही रहेगा।

लगातार सतर्क, हर मोर्चे पर तैयार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को देखते हुए भारतीय सेना लगातार अपनी तैयारियों की समीक्षा कर रही है। साफ है कि भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए भारत अब हर स्तर पर खुद को तैयार कर रहा है—चाहे वह पारंपरिक युद्ध हो या आधुनिक तकनीक आधारित संघर्ष।

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