बरेली। शहर की सड़कों और फुटपाथों को बिल्डिंग मटेरियल की दुकान और निर्माण मलबे का डंपिंग ग्राउंड बनाने वालों पर अब नगर निगम का डंडा चलेगा। सड़क, पटरी और नगर निगम की भूमि पर बालू, बजरी, ईंट समेत निर्माण सामग्री रखकर कारोबार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नियम तोड़ने पर सामग्री जब्त करने के साथ 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्माना नहीं चुकाने पर दुकान का लाइसेंस जब्त करने और प्रतिष्ठान सीज करने तक की कार्रवाई होगी।
नगर निगम ने निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 में आंशिक संशोधन करते हुए व्यवस्था को और सख्त किया है। शहर में भवन, सड़क, कॉलोनी अथवा अन्य निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा अब मनमाने तरीके से सड़क, फुटपाथ, पार्क या अन्य सार्वजनिक स्थान पर नहीं डाला जा सकेगा।
सड़क किनारे दुकान सजाई तो सामान उठाएगा निगम
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के मुताबिक नगर निगम की भूमि अथवा सड़क किनारे पटरी पर बिल्डिंग मटेरियल डालकर व्यवसाय करने वाले बाहरी व्यक्तियों और कारोबारियों को ऐसा करने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। कैरिंग चार्ज और जुर्माना जमा नहीं करने पर निर्माण सामग्री जब्त होगी और उसे उठाने में आया खर्च भी संबंधित प्रतिष्ठान से वसूला जाएगा।
मलबा सड़क पर मिला तो नजदीकी भवन मालिक-बिल्डर से जवाब-तलब
निगम के मुताबिक मलबा और टूटी निर्माण सामग्री सड़कों एवं गलियों में छोड़ने से धूल और वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। निर्माण के दौरान ग्रीन नेट लगाना भी अनिवार्य किया गया है। निगम द्वारा निर्धारित स्थानों के अलावा सड़क, पटरी और पार्क जैसे सार्वजनिक स्थल पर मलबा मिलने पर नजदीकी भवन स्वामी, प्रतिष्ठान संचालक, ठेकेदार अथवा बिल्डर की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि मलबा किसी दूसरे व्यक्ति ने डाला है तो संबंधित स्थानीय व्यक्ति को निगम को इसकी सूचना देनी होगी।
जुर्माने का विरोध पड़ा तो चार गुना चालान
कार्रवाई के दौरान जुर्माना जमा करने में व्यवधान या विरोध करना भी महंगा पड़ेगा। नगर निगम के अनुसार निर्धारित जुर्माने का भुगतान करने में विरोध की स्थिति में 20 हजार रुपये तक की प्रत्येक श्रेणी में चार गुना तक चालान की कार्रवाई कर मामला न्यायालय भेजा जा सकता है। जुर्माना नहीं भरने पर संबंधित दुकान का लाइसेंस जब्त कराने और सीलिंग की कार्रवाई भी की जाएगी।
मलबे के लिए शहर में 10 ठिकाने तय
नगर निगम ने निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले मलबे के निस्तारण के लिए शहर में 10 स्थान चिह्नित किए हैं। इनमें वही विहार, बीसलपुर रोड, सैदपुर हाकिंस, हजियापुर शेल्टर होम, चौपुला-नेकपुर, शांति विहार, सिटौरा, सीआई पार्क, जगतपुर और आईटीआई गेट क्षेत्र शामिल हैं। भवन स्वामी, प्रतिष्ठान और बिल्डर को निर्माण से निकला मलबा इन्हीं निर्धारित स्थलों पर पहुंचाना होगा। निगम यहां से मलबा उठाकर डंपिंग स्टेशन पहुंचाएगा।
मलबे की मात्रा बढ़ी तो 50 हजार तक लगेगा जुर्माना
नियमों के उल्लंघन पर मलबे की मात्रा के आधार पर जुर्माना तय किया गया है। छोटी मात्रा में मलबा डालने पर 500 और एक हजार रुपये से जुर्माने की शुरुआत होगी। 10 से 20 घन मीटर तक मलबा मिलने पर 20 हजार रुपये और 20 घन मीटर से अधिक होने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।
बड़े प्रोजेक्ट को पहले देना होगा ‘वेस्ट मैनेजमेंट प्लान’
एक दिन में 20 टन या इससे अधिक अथवा किसी परियोजना में एक महीने के दौरान 300 टन अपशिष्ट पैदा करने वाले निर्माणकर्ताओं के लिए अलग व्यवस्था होगी। उन्हें कंक्रीट, मिट्टी, इस्पात, लकड़ी, प्लास्टिक, ईंट और मोर्टार जैसी सामग्री को अलग-अलग करना होगा। निर्माण, ध्वस्तीकरण अथवा री-मॉडलिंग शुरू करने से पहले वेस्ट मैनेजमेंट प्लान प्रस्तुत कर स्थानीय प्राधिकरण की मंजूरी भी लेनी होगी। निगम के सक्षम अधिकारी के मांगने पर निर्माण कार्य का स्वीकृत प्लान और ले-आउट भी दिखाना होगा।
घर से मलबा उठवाना है तो 1533 पर करें कॉल
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के डोर-स्टेप कलेक्शन के लिए नगर निगम ने कंट्रोल रूम नंबर 7055519637 और टोल फ्री नंबर 1533 जारी किया है। भवन स्वामी अथवा निर्माणकर्ता इन नंबरों पर संपर्क कर निर्धारित यूजर फीस देकर नगर निगम की अधिकृत एजेंसी से मलबा उठवा सकेंगे। नगर निगम ने आम लोगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, ठेकेदारों और बिल्डरों से साफ कहा है कि सड़क और फुटपाथ पर निर्माण सामग्री या मलबा न डालें। अब सड़क को गोदाम या डंपिंग यार्ड बनाया तो जेब पर जुर्माने की चोट के साथ सामान और प्रतिष्ठान पर भी कार्रवाई की तलवार लटकेगी।