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up newsगाड़ी टोचन कर ले जाती ट्रैफिक पुलिस, व कार्यालय के बाहर खड़ीं महिला।

बरेली। अपनी शिकायत लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं एक महिला डॉक्टर की कार ट्रैफिक पुलिस द्वारा टोचन कर पुलिस लाइन पहुंचाए जाने पर गुरुवार को कलेक्ट्रेट में जमकर हंगामा हुआ। बाहर निकलने पर कार गायब मिली तो डॉ. कृतिका भड़क गईं और दोबारा डीएम कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई पर सवाल उठाए। करीब एक घंटे तक चली गहमागहमी के बाद जिलाधिकारी अविनाश सिंह के हस्तक्षेप पर कार पुलिस लाइन से वापस कलेक्ट्रेट मंगवाई गई। डीएम ने कहा कि महिला अपनी समस्या लेकर आई थीं, उनकी बात सुनकर समाधान के निर्देश दिए गए हैं। कार ट्रैफिक पुलिस के ले जाने की जानकारी मिलने पर उसे भी वापस मंगवा दिया गया।

डॉ. कृतिका दोपहर करीब 12 बजे अपनी पुरानी मारुति 800 कार से जिलाधिकारी अविनाश सिंह को शिकायती पत्र देने कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। शिकायत देने के बाद वह बाहर निकलीं तो उनकी कार वहां नहीं थी। पूछताछ करने पर पता चला कि ट्रैफिक पुलिस कार को क्रेन से टोचन कर पुलिस लाइन ले गई है। यह सुनते ही डॉ. कृतिका नाराज हो गईं। वह दोबारा डीएम कार्यालय पहुंचीं और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ने पर कलेक्ट्रेट में भीड़ जमा हो गई और काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।

पार्किंग ही नहीं तो आम आदमी गाड़ी कहां खड़ी करे?

डॉ. कृतिका ने कलेक्ट्रेट और शहर की पार्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब प्रशासन पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध नहीं करा पा रहा है तो अपनी फरियाद लेकर सरकारी कार्यालय आने वाला व्यक्ति वाहन कहां खड़ा करे। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में रसूखदार लोगों की लग्जरी गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, जबकि उनकी पुरानी मारुति 800 को तत्काल उठा लिया गया। उन्होंने इसे आम नागरिक को परेशान करने वाली कार्रवाई बताया।

द्रौपदी के चीरहरण की तरह जिम्मेदार देख रहे तमाशा

मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. कृतिका ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए व्यवस्था की तुलना महाभारत के द्रौपदी चीरहरण प्रसंग से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह उस समय जिम्मेदार लोग आंखें मूंदकर तमाशा देख रहे थे, उसी तरह आज भी आम आदमी परेशान होता है और जिम्मेदार व्यवस्था मूकदर्शक बनी रहती है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर मीठी जुबान और फीके पकवान जैसी टिप्पणी भी की। उनका कहना था कि केवल आश्वासन देने के बजाय शिकायतों पर जमीनी कार्रवाई होनी चाहिए।

गीता का श्लोक सुनाकर अफसरों को याद दिलाई जिम्मेदारी

डॉ. कृतिका ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र में बैठे प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना काम करने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के समाधान के नाम पर केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। पीड़ित को वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब अधिकारी फाइलों से बाहर निकलकर मौके पर कार्रवाई करेंगे।

पिता की मौत के बाद उत्पीड़न का लगाया आरोप

डॉ. कृतिका ने बताया कि वह अपने साथ हो रहे कथित उत्पीड़न की शिकायत लेकर डीएम कार्यालय पहुंची थीं। उनका आरोप है कि पिता के निधन के बाद से कुछ लोग उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं और उनके मकान के आसपास तोड़फोड़ की जा रही है। इसी मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर वह कलेक्ट्रेट आई थीं। डॉक्टर ने कहा कि वह पहले से अपनी समस्या को लेकर परेशान हैं और कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद उनकी कार उठा लिए जाने से उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

डीएम के हस्तक्षेप के बाद वापस कलेक्ट्रेट पहुंची कार

मामला बढ़ने के बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। पुलिस लाइन पहुंचाई गई डॉ. कृतिका की कार को वापस कलेक्ट्रेट मंगवाया गया और उन्हें सौंप दिया गया। कार वापस पहुंचने पर उन्होंने मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के सामने भी कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। इस पूरे घटनाक्रम ने सवाल खड़ा कर दिया कि कार किस यातायात नियम के उल्लंघन में उठाई गई थी और बाद में उसे वापस मंगवाने की जरूरत क्यों पड़ी।

डीएम बोले- महिला की बात सुनी, समाधान के दिए आदेश

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर कहा एक महिला अपनी समस्या लेकर हमारे पास आई थीं। हमने उनकी बात सुनी और तत्काल समस्या के समाधान के आदेश दिए हैं। जानकारी में आया कि उनकी कार को ट्रैफिक पुलिस ले गई थी, जिसे वापस मंगवा दिया गया। वहीं ट्रैफिक एसपी अकमल खान से मामले के संबंध में जानकारी की गई तो उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी होने से इनकार किया।

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