बरेली। मोबाइल चोरी से लेकर बैंक खाते खाली करने और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोहों पर बरेली रेंज पुलिस ने ऐसा ‘वज्र’ चलाया कि पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया। सात दिन तक चले विशेष अभियान में 91 साइबर अपराधी सलाखों के पीछे पहुंच गए, जबकि लाखों की नकदी, दर्जनों मोबाइल, एटीएम कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी बरामद कर पुलिस ने साइबर माफिया के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
डीआईजी रेंज अजय कुमार साहनी की निगरानी में चलाए गए अभियान में साइबर सेल, साइबर थाना, एसओजी और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त टीमों ने डिजिटल सर्विलांस, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन, मोबाइल डेटा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कड़ी जोड़ते हुए साइबर गिरोहों तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान कई राज्यों में फैले नेटवर्क और म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
मोबाइल चोरी के पीछे निकला करोड़ों की साइबर ठगी का खेल
बरेली साइबर थाना पुलिस की जांच में एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ, जिसके तार सीधे झारखंड के जामताड़ा और नाला से जुड़े मिले। गिरोह के सदस्य रेलवे स्टेशन, बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी करते थे। चोरी के मोबाइल झारखंड भेजे जाते थे, जहां उनमें मौजूद बैंकिंग और डिजिटल जानकारी का इस्तेमाल कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस के अनुसार गिरोह मोबाइल चोरी के लिए नाबालिग का भी इस्तेमाल करता था। शाहजहांपुर के कांट क्षेत्र में पकड़े गए आरोपी लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके मोबाइल में फर्जी APK फाइल इंस्टॉल कराते थे। इसके जरिए ओटीपी और बैंकिंग अलर्ट सीधे अपने हैंडलर तक पहुंचा दिए जाते थे। कुछ ही मिनटों में खातों से रकम निकाल ली जाती थी और बदले में आरोपियों को USDT क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कमीशन मिलता था।
बरामदगी ने खोली साइबर गिरोह की ताकत
अभियान के दौरान पुलिस ने 26.76 लाख रुपये नकद, 72 मोबाइल फोन, 31 एटीएम कार्ड, 940 यूएसडीटी, तीन फर्जी आधार कार्ड, एक पेटीएम स्कैनर और एक क्रिप्टो सीड डिवाइस बरामद की। यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और लंबे समय से साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। डीआईजी ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो बिना देर किए 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के अनुसार ठगी के बाद शुरुआती 30 मिनट सबसे अहम होते हैं। इसी दौरान सूचना मिलने पर रकम फ्रीज कराने और वापस दिलाने की संभावना सबसे अधिक रहती है।