लखनऊ। इस रक्षाबंधन बहनों के प्यार की डोर सिर्फ भाइयों की कलाई तक ही नहीं पहुंचेगी, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं की किस्मत भी चमकाएगी। उत्तर प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों की दीदियों के हाथों से बनी हस्तनिर्मित राखियां इस बार बाजारों में धूम मचाने को तैयार हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए पहली बार इन राखियों को ऑनलाइन बिक्री मंचों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है, जिससे गांवों का हुनर अब देशभर के घरों तक पहुंचेगा।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर मिशन ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने में जुटा है। उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही राखियां न केवल उनकी आय बढ़ाएंगी, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को भी नई मजबूती देंगी। इससे महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का सपना और साकार होगा।
मोती, जरी, कुंदन से लेकर पर्यावरण अनुकूल राखियां तक तैयार
प्रयागराज, वाराणसी, बागपत, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, उन्नाव, शामली, जौनपुर और मिर्जापुर समेत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में समूह की महिलाएं सूती धागे, रेशम, मोती, जरी, कुंदन, लकड़ी, कपड़े, अनाज और अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। बच्चों के लिए विशेष राखियां, पारंपरिक डिजाइनों वाली राखियां और नई थीम पर आधारित राखियां भी लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं। यूपीएसआरएलएम स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग, बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता संवर्धन और डिजिटल प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दे रहा है। उद्देश्य है कि ग्रामीण महिलाओं के हाथों से बने उत्पाद देशभर के ग्राहकों तक पहुंचें और उन्हें स्थायी एवं व्यापक बाजार मिल सके।
अब घर बैठे खरीद सकेंगे ‘दीदियों’ की राखियां
मिशन निदेशक अरुण कुमार के निर्देशन में इन हस्तनिर्मित राखियों को अमेजन, फ्लिपकार्ट और ई-सरस जैसे ऑनलाइन बिक्री मंचों पर उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे गांवों में तैयार होने वाली राखियां देशभर के ग्राहकों तक पहुंचेंगी और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यूपीएसआरएलएम ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि इस रक्षाबंधन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों को प्राथमिकता दें। आपकी खरीदी गई एक राखी न केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बनेगी, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं के परिवारों की खुशहाली, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की भी मजबूत डोर बनेगी।