बरेली। स्वास्थ्य विभाग की सरपरस्ती में चल रहे अवैध अस्पताल लगातार मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। पिछले दिनों भमोरा में डॉक्टर के गलत इलाज से महिला की मौत हो गई, अब बहेड़ी में एक अस्पताल के डॉक्टर ने 5 महीने की गर्भवती महिला के पेट की 4 बार सफाई कर दी। जिससे महिला की आंत फट गई। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने कार्रवाई करने की बजाय मामले को दबा दिया। पीड़ित महिला का पति ढाई महीने से अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे कार्रवाई का आश्वासन देकर टरका दिया जाता है।
देवरनिया के कठर्रा निवासी मो इशाक ने 19 जून को अपनी पत्नी सिमरन को पेट में दर्द की शिकायत पर बहेड़ी के गांधी अस्पताल में भर्ती कराया था। पत्नी सिमरन 5 महीने की गर्भवती थी। डॉक्टर ने ईशाक से कहा कि आपकी पत्नी के पेट में बच्चे की मौत हो गई है, इस वजह से पेट की सफाई करनी होगी। गांधी अस्पताल के डॉक्टर नावेद और नीलेश ने उनकी पत्नी के पेट की चार बार सफाई कर दी। जिससे गर्भवती की आंत फट गई। महिला की हालत ज्यादा बिगड़ी तो डॉक्टरों ने अपना पल्ला झाड़ते हुए बरेली किसी अस्पताल में दिखाने की बात कही।
दर्द बढ़ा तो फिर अस्पताल पहुंचे, दोबारा कर दी सफाई
कुछ दिन बाद महिला के पेट में तेज दर्द हुआ। परिजन उसे दोबारा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि वहां फिर महिला की सफाई की गई और इंजेक्शन देकर हालत ठीक बताई गई। इसके बाद अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई। 29 जून को परिजन अल्ट्रासाउंड लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान भी महिला के पेट से कुछ निकाला गया। 29 जून की रात करीब सात बजे महिला की हालत अचानक बेहद खराब हो गई। परिजन उसे लेकर फिर गांधी अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि वहां एक बार फिर सफाई की गई, लेकिन महिला को आराम नहीं मिला। इसके बाद डॉक्टरों ने परिजनों से बरेली में किसी अस्पताल में दिखाने की बात कही। परिजनों का कहना है कि महिला की हालत इतनी खराब थी कि वे उसे लेकर सीधे बरेली के डिवाइन अस्पताल पहुंचे।
बरेली में जांच हुई तो उड़ गए होश, फटी थी बड़ी आंत
डिवाइन अस्पताल में महिला की जांच शुरू हुई। खून की व्यवस्था कराई गई और अल्ट्रासाउंड कराया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने पेट का ऑपरेशन करने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान महिला की बड़ी आंत करीब तीन इंच फटी मिली। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर आंत को ठीक किया। महिला को कई यूनिट खून चढ़ाया गया। परिजनों के मुताबिक हालत इतनी गंभीर थी कि उसे लंबे समय तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। मोहम्मद ईशाक का कहना है कि वह मजदूरी कर परिवार चलाता है। पत्नी के इलाज में अब तक करीब 4.50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और अब उसके पास इलाज कराने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। परिवार का आरोप है कि डॉक्टर नावेद ने इलाज का खर्च उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में करीब 60 हजार रुपये देने के बाद आगे मदद से इनकार कर दिया।
इलाज नहीं मिला तो पत्नी की जान जा सकती है
पीड़ित परिवार का कहना है कि महिला की हालत बेहद गंभीर हो गई थी। परिवार में एक छोटी बेटी भी है। पति का कहना है कि इलाज के भारी खर्च ने पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है। मामले में सीएमओ विश्राम सिंह से शिकायत कर डॉक्टर नावेद और नीलेश के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही महिला के इलाज में मदद की गुहार लगाई गई है। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही साफ होगा कि महिला की बड़ी आंत किस वजह से फटी और इलाज के दौरान वास्तव में क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के मालिक डॉक्टर नावेद ने बताया कि उन पर लगे सारे आरोप झूठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित महिला को पति ईशाक ने उनसे 1.50 लाख रुपये भी लिये हैं, इसके बाद भी उन्होंने सीएमओ ऑफिस में शिकायत कर दी।
नोडल अधिकारी का बयान
नोडल अधिकारी डॉ लईक अंसारी ने बताया कि अस्पताल को सील कर दिया गया है, वर्तमान में अस्पताल सील है, उसके रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल आई हुई है।