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वॉशिंगटन/नई दिल्ली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नई रिपोर्ट ने दुनिया में हथियारों की बढ़ती होड़ का बड़ा खुलासा किया है। साल 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च बढ़कर 2.89 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो लगातार 11वें साल बढ़ोतरी का संकेत है। इस लिस्ट में भारत ने भी चौंकाते हुए टॉप-5 में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

भारत का बड़ा उछाल, पांचवें नंबर पर पहुंचा

SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2025 में अपना सैन्य खर्च 8.9% बढ़ाकर 92.1 अरब डॉलर कर दिया। इसके साथ ही भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बन गया है।

टॉप-3 में अमेरिका, चीन और रूस का दबदबा

रिपोर्ट के अनुसार:

  • अमेरिका – 954 अरब डॉलर (पहला स्थान)
  • चीन – 336 अरब डॉलर (अनुमानित, दूसरा स्थान)
  • रूस – 190 अरब डॉलर (तीसरा स्थान)

हालांकि अमेरिका के खर्च में 7.5% की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन वह अब भी सबसे आगे बना हुआ है।

टॉप-10 देशों की सूची

  • अमेरिका – $954 अरब
  • चीन – $336 अरब (अनुमानित)
  • रूस – $190 अरब (अनुमानित)
  • जर्मनी – $114 अरब
  • भारत – $92.1 अरब
  • सऊदी अरब – $81.5 अरब (अनुमानित)
  • यूक्रेन – $84.1 अरब
  • यूनाइटेड किंगडम – $80.2 अरब
  • जापान – $67.4 अरब
  • फ्रांस – $66.5 अरब

क्यों बढ़ रहा है दुनिया का सैन्य खर्च?

रिपोर्ट के अनुसार यूरोप में 14% की भारी बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण है। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक असुरक्षा ने देशों को तेजी से हथियारों पर खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव ने भी रक्षा खर्च बढ़ाने में भूमिका निभाई। पाकिस्तान ने भी अपना खर्च 11% बढ़ाकर 11.9 अरब डॉलर कर लिया। जहां एक ओर कई देशों ने रक्षा बजट बढ़ाया, वहीं ईरान और इजरायल जैसे देशों में आर्थिक कारणों और हालात बदलने से खर्च में गिरावट दर्ज की गई।

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