लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया राजीव कृष्ण का प्रशासनिक सफर कई अहम पड़ावों से गुजरा है। 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण वर्ष 2016 में एडीजी बने और फरवरी 2024 में उन्हें डीजी रैंक पर पदोन्नति मिली। इसके बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की जिम्मेदारी, कार्यवाहक डीजीपी की कमान और फिर पूर्णकालिक डीजीपी के पद तक उनका सफर पहुंचा।
2016 में बने ADG, आठ साल बाद मिला DG का रैंक
राजीव कृष्ण की सेवा में एक बड़ा पड़ाव एक जनवरी 2016 को आया, जब उन्हें एडीजी पद पर पदोन्नत किया गया। करीब आठ साल बाद एक फरवरी 2024 को वह डीजी रैंक पर पहुंचे। इसके बाद शासन ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं।
सिपाही भर्ती की चुनौती के बीच संभाला भर्ती बोर्ड
राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की कमान भी सौंपी गई। वर्ष 2024 में आरक्षी नागरिक पुलिस के 60,244 पदों की भर्ती परीक्षा पेपर लीक होने के बाद रद्द कर दी गई थी। दोबारा परीक्षा कराने और इतनी बड़ी भर्ती प्रक्रिया को पटरी पर लाने की चुनौती के बीच उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ ही वह शासन के भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल होते गए।
31 मई 2025 को पहुंचे यूपी पुलिस के शीर्ष पद पर
राजीव कृष्ण के करियर में सबसे बड़ा मोड़ 31 मई 2025 को आया। तत्कालीन डीजीपी प्रशांत कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद शासन ने राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का कार्यवाहक डीजीपी बनाया। इसके साथ ही वह प्रदेश पुलिस के सर्वोच्च पद पर पहुंच गए।
एक साल बाद कार्यवाहक से बने पूर्णकालिक DGP
कार्यवाहक डीजीपी के रूप में करीब एक साल तक यूपी पुलिस की कमान संभालने के बाद राजीव कृष्ण को 31 मई 2026 को पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया। इस फैसले के साथ उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था भी खत्म हुई और प्रदेश पुलिस को पूर्णकालिक मुखिया मिला।
ADG से DG और फिर DGP तक पहुंचा सफर
राजीव कृष्ण के करियर की समयरेखा देखें तो वर्ष 2016 में एडीजी, फरवरी 2024 में डीजी, मई 2025 में कार्यवाहक डीजीपी और मई 2026 में पूर्णकालिक डीजीपी की जिम्मेदारी उनके हिस्से आई। तीन दशक से अधिक की पुलिस सेवा में उन्होंने फील्ड से लेकर पुलिस मुख्यालय और भर्ती बोर्ड तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
जून 2029 तक है सेवा अवधि
राजीव कृष्ण की सेवानिवृत्ति जून 2029 में प्रस्तावित है। ऐसे में पूर्णकालिक डीजीपी बनने के बाद उनके पास प्रदेश पुलिस की कमान संभालने के लिए लंबा कार्यकाल है। कानून-व्यवस्था, पुलिस आधुनिकीकरण, भर्ती प्रक्रिया और तकनीक के इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में उनकी प्राथमिकताओं पर अब नजर रहेगी।
‘सबसे तेज प्रमोशन’ कहना ठीक नहीं
राजीव कृष्ण के हाल के वर्षों में बढ़े कद और जिम्मेदारियों को लेकर उनका करियर चर्चा में जरूर है, लेकिन इसे किसी आईपीएस अधिकारी का ‘सबसे तेज प्रमोशन’ कहना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। एडीजी से डीजी बनने में उन्हें करीब आठ वर्ष लगे, जबकि कार्यवाहक और पूर्णकालिक डीजीपी कोई अलग पुलिस रैंक नहीं, बल्कि डीजी रैंक के अधिकारियों में से मिलने वाली जिम्मेदारी है। इसलिए उनके सफर को ‘तेज प्रमोशन’ के बजाय ‘डीजी बनने के बाद तेजी से बढ़ी जिम्मेदारियां’ कहना अधिक सटीक होगा।