देहरादून/टिहरी। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर दर्दनाक हादसे ने कई घरों के चिराग बुझा दिए। टिहरी गढ़वाल के चंबा-कोटी कॉलोनी रोड पर नैल के पास एक मैक्स वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतक सभी घनसाली क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के रहने वाले थे, जो एक अंतिम संस्कार से लौट रहे थे। एक पल में खुशियों से भरा सफर चीख-पुकार और मातम में बदल गया।
अंतिम संस्कार से लौटते समय टूटी जिंदगी की डोर
जानकारी के अनुसार, वाहन में करीब 10 लोग सवार थे, जो हरिद्वार में एक अंतिम संस्कार में शामिल होकर अपने गांव लौट रहे थे। दोपहर करीब 3:30 बजे जैसे ही वाहन नैल के पास पहुंचा, चालक का संतुलन बिगड़ गया और गाड़ी सीधे गहरी खाई में जा गिरी। पहाड़ों की खतरनाक सड़कों पर एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो जाती है, और इस बार भी वही हुआ। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने जब गाड़ी गिरने की आवाज सुनी, तो वे तुरंत मौके की ओर दौड़े। खाई इतनी गहरी थी कि नीचे तक पहुंचना आसान नहीं था। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पूरा इलाका अफरा-तफरी और मातम में डूब गया।
SDRF और पुलिस ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंची। बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों और घायलों को खाई से बाहर निकाला। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे। बचाव कार्य कई घंटों तक चला। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने 8 लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं, दो घायलों को गंभीर हालत में खाई से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की पहचान उत्तम (30) और अंकित (22) के रूप में हुई है, जिनका इलाज बौराड़ी स्थित जिला अस्पताल में चल रहा है।
मौके पर पहुंचीं जिलाधिकारी, प्रशासन अलर्ट
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल खुद घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत कार्यों की निगरानी की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही हादसे के कारणों की भी जांच के आदेश दिए गए हैं। हादसे की खबर जैसे ही मृतकों के गांवों—चांजी, ठेला और चकरेडा—में पहुंची, वहां कोहराम मच गया। कई घरों में एक साथ चूल्हे बुझ गए। परिजन बेसुध हैं और गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। एक ही हादसे में इतने लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अब एक साथ कई अर्थियां उठेंगी, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगतों के प्रति संवेदना जताते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि मृत आत्माओं को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति दें। साथ ही उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि घायलों का बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए। यह हादसा एक बार फिर उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों की खतरनाक हकीकत को उजागर करता है। संकरी सड़कें, गहरी खाई और तेज मोड़—इन सबके बीच जरा सी लापरवाही भी मौत का कारण बन जाती है। स्थानीय लोग लंबे समय से इन सड़कों पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलती है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा इंतजाम
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सड़क पर पर्याप्त सुरक्षा उपाय थे? क्या वाहन की हालत ठीक थी? क्या चालक ने सावधानी बरती? इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल 8 परिवारों ने अपने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया है।यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए जिंदगी भर का जख्म बन गया है। जिन लोगों ने सुबह अपने अपनों को हंसते हुए विदा किया था, शाम तक उनके शव घर पहुंचे। यह दर्द शायद ही कभी कम हो पाएगा।