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पेरिस/नई दिल्ली। फ्रांस के नए रक्षा बजट और ‘मिलिट्री प्रोग्रामिंग लॉ’ (LPM 2024-2030) ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। एक तरफ फ्रांस अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक बनाने के लिए 36 अरब यूरो खर्च करने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के लिए ‘सुपर राफेल’ F5 की डिलीवरी को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल—जब फ्रांस खुद 2035 तक सिर्फ 47 राफेल F5 अपने पास रखने की योजना बना रहा है, तो भारत को प्रस्तावित 24 राफेल F5 आखिर कब मिलेंगे?

फ्रांस का बड़ा प्लान: रक्षा बजट दोगुना, फोकस हाई-टेक युद्ध पर

फ्रांस ने 2024 से 2030 के लिए अपने रक्षा ढांचे को पूरी तरह बदलने का खाका तैयार किया है। इस योजना के तहत रक्षा बजट 2030 तक बढ़कर 76.3 बिलियन यूरो हो जाएगा, जो 2017 के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसका मकसद सिर्फ पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि भविष्य के हाई-टेक और मल्टी-डोमेन युद्धों के लिए तैयारी करना है।

SAMP/T NG और ड्रोन सिस्टम पर बड़ा निवेश

फ्रांस अपने एयर डिफेंस को मजबूत करने के लिए SAMP/T NG सिस्टम के विकास में 1.6 बिलियन यूरो का निवेश करेगा। इसके अलावा मानव रहित और रोबोटिक सिस्टम के लिए करीब 2 बिलियन यूरो तय किए गए हैं। यानी साफ है कि फ्रांस अब ‘नेक्स्ट जेनरेशन वॉरफेयर’ पर पूरी तरह फोकस कर रहा है।

राफेल F5: क्या होगा खास?

राफेल F5 को फ्रांस का सबसे एडवांस लड़ाकू विमान माना जा रहा है। हालांकि इसमें स्टील्थ तकनीक नहीं होगी, लेकिन इसकी मारक क्षमता और तकनीकी अपग्रेड इसे दुनिया के सबसे घातक फाइटर जेट्स में शामिल करेंगे।

  • BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) क्षमता में बड़ा इजाफा
  • 4 की जगह 6 मेटियोर मिसाइल ले जाने की क्षमता
  • नया Safran M88 T-REX इंजन
  • बेहतर थ्रस्ट और थर्मल एफिशिएंसी
  • लंबी अवधि तक हवा में रहने की क्षमता

6 मेटियोर मिसाइलें—हवाई युद्ध में ‘गेमचेंजर’

राफेल F5 की सबसे बड़ी ताकत इसकी मिसाइल कैरिंग क्षमता है। जहां मौजूदा राफेल (F3R/F4) सिर्फ 4 मेटियोर मिसाइलें ले सकता है, वहीं F5 में यह संख्या बढ़ाकर 6 कर दी जाएगी। इससे एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता बढ़ेगी और डॉगफाइट में यह जेट और ज्यादा खतरनाक बन जाएगा।

इंजन अपग्रेड: ताकत और रफ्तार दोनों में बढ़त

F5 में नया Safran M88 T-REX इंजन लगाया जाएगा, जो ज्यादा थ्रस्ट और बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी देगा। इससे भारी हथियारों के बावजूद विमान की स्पीड और मैन्युवरिंग पर असर नहीं पड़ेगा। यानी यह जेट ज्यादा वजन के साथ भी तेजी से ऑपरेट कर सकेगा।

भारत की डील पर सवाल क्यों?

भारत फिलहाल फ्रांस के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की बातचीत कर रहा है, जिसमें कम से कम 24 राफेल F5 वेरिएंट शामिल होने की उम्मीद है। लेकिन असली समस्या उत्पादन क्षमता और टाइमलाइन को लेकर है।

  • F5 का प्रोडक्शन अभी शुरुआती चरण में है
  • फ्रांस खुद 2035 तक सिर्फ 47 जेट अपने पास रखेगा
  • प्रोडक्शन लाइन की क्षमता सीमित हो सकती है

ऐसे में सवाल उठता है कि भारत को इन जेट्स की डिलीवरी कब और कैसे होगी।

क्या पिछली डील जैसा भरोसा कायम रहेगा?

2018 में भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल जेट की डील हुई थी, जिसकी डिलीवरी लगभग तय समय पर पूरी हो गई थी। हालांकि कुछ जेट्स में 6 महीने की देरी हुई, लेकिन उसमें लॉजिस्टिक कारण भी शामिल थे। इस बार मामला ज्यादा जटिल है, क्योंकि F5 एक नया और विकसित हो रहा प्लेटफॉर्म है।

डिलीवरी तय करेगी डील की शर्तें

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस बार डील के समय ही डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर सख्त शर्तें रखनी होंगी। इसके अलावा यह भी तय करना होगा—

  • भारत कौन-कौन से कस्टमाइजेशन चाहता है
  • प्रोडक्शन लाइन कितनी तेजी से बढ़ेगी
  • क्या भारत में भी मैन्युफैक्चरिंग या असेंबली होगी

रणनीतिक मायने: भारत के लिए क्यों जरूरी है F5?

भारत के लिए राफेल F5 सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ताकत है। चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर खतरे को देखते हुए भारतीय वायुसेना को एडवांस टेक्नोलॉजी वाले जेट्स की जरूरत है। F5 की बढ़ी हुई मारक क्षमता और मल्टी-रोल ऑपरेशन इसे भविष्य के युद्ध के लिए अहम बनाते हैं।

आने वाले सालों में बढ़ेगा इंतजार?

फिलहाल साफ है कि राफेल F5 का प्रोडक्शन धीरे-धीरे शुरू होगा और इसकी पूरी क्षमता 2030 के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में भारत को इन जेट्स के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जब तक कि फ्रांस प्रोडक्शन क्षमता नहीं बढ़ाता।

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