बरेली/कानपुर। जेन-जी के बाद अब जेन-अल्फा भी अपने हक और सुविधाओं को लेकर बेबाकी से आवाज उठाने लगी है। मंगलवार को बरेली और कानपुर के स्कूलों में अधिकारियों के सामने बच्चों ने बिना झिझक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। कहीं थाली में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठे तो कहीं यूनिफॉर्म की रकम, पानी, कंप्यूटर और खेल सामग्री की कमी सामने आई। बच्चों की शिकायतें सुनकर अधिकारियों को मौके पर ही व्यवस्था सुधारने के निर्देश देने पड़े।
बरेली में बोले बच्चे—साहब, खाना अच्छा नहीं मिलता
बरेली में डीपीआरओ कमल किशोर मंगलवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय डोहरा का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया तो बच्चों ने मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठा दिए। बच्चों ने साफ कहा कि उन्हें मिलने वाला खाना अच्छा नहीं है। निरीक्षण में भी मिड-डे मील की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। डीपीआरओ ने मेन्यू के मुताबिक भोजन परोसने और गुणवत्तापूर्ण मसालों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत के प्रशासक, प्रधानाध्यापक और रसोइयों को व्यवस्था में तत्काल सुधार की चेतावनी दी गई।
150 बच्चों को नहीं मिला यूनिफॉर्म का पैसा
बच्चों से बातचीत में एक और बड़ी खामी सामने आई। विद्यालय में 253 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष करीब 150 बच्चों को यूनिफॉर्म की धनराशि नहीं मिली थी। डीपीआरओ ने प्रधानाध्यापक को संबंधित विभाग से समन्वय कर बच्चों के खातों में रकम दिलाने के निर्देश दिए। हालांकि ऑपरेशन कायाकल्प के सभी 19 पैरामीटर पर विद्यालय संतृप्त मिला। प्रधानाध्यापक ने कक्षाओं में फर्नीचर की कमी भी अधिकारियों के सामने रखी।
शौचालय बंद, सफाई व्यवस्था पर भी निर्देश
निरीक्षण के दौरान विद्यालय का एक शौचालय लंबे समय से बंद मिला। डीपीआरओ ने सचिव को इसकी तत्काल मरम्मत कराकर इस्तेमाल योग्य बनाने को कहा। सफाई कर्मचारी सुनीता देवी को प्रतिदिन विद्यालय पहुंचकर साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद डीपीआरओ उच्च प्राथमिक विद्यालय डोहरिया पहुंचे। यहां तस्वीर अलग मिली। बच्चों ने मिड-डे मील की गुणवत्ता की तारीफ की। अधिकारियों ने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों से लगातार संवाद करें, ताकि उनकी समस्याएं समय रहते सामने आ सकें। सफाई कर्मचारी इरशाद को भी रोज विद्यालय की सफाई करने के निर्देश दिए गए। विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था संतोषजनक मिली। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत अधिकारी विपिन कुमार भी मौजूद रहे।
कानपुर में भी जेन-अल्फा बेबाक, मेस से कंप्यूटर तक गिनाईं दिक्कतें
बच्चों की यही बेबाकी कानपुर के कल्याणपुर स्थित समाज कल्याण विभाग के आश्रम पद्धति सर्वोदय विद्यालय में भी देखने को मिली। समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह, सीडीओ अभिनव जैन और जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर छात्रों से संवाद करने पहुंचे तो बच्चों ने हॉस्टल की अव्यवस्थाओं की पूरी फेहरिस्त सामने रख दी। छात्रों ने मेस के भोजन की खराब गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए रविवार को मिलने वाली तहरी, सलाद और पापड़ तक का जिक्र किया। शिकायत सुनते ही निदेशक ने मेस संचालित करने वाले समूह को बदलने के निर्देश दिए।
पानी की टंकी से कंप्यूटर लैब तक उठाए सवाल
छात्रों ने हॉस्टल में पानी के संकट की शिकायत की तो निदेशक ने पुरानी ओवरहेड टंकी तोड़कर नई टंकी बनवाने को कहा। बच्चों ने कंप्यूटर लैब के पुराने सिस्टम का मुद्दा उठाते हुए बताया कि अपडेट कंप्यूटर नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस पर कंप्यूटर सिस्टम अपडेट कराने के निर्देश दिए गए। खेल सामग्री की कमी सामने आने पर अतिरिक्त स्पोर्ट्स सामान खरीदने को कहा गया। छात्रों ने अभ्युदय कक्षाओं के समय को लेकर भी परेशानी बताई। उनका कहना था कि विद्यालय का समय सुबह 10 से शाम चार बजे तक है, जबकि अभ्युदय की कक्षाएं दोपहर 3:30 बजे शुरू हो जाती हैं। इससे उनकी कक्षाएं छूट जाती हैं। निदेशक ने इसका समय बदलने के निर्देश दिए।
हॉस्टल में धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्य को भी तेज करने को कहा गया। समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों से सीधे संवाद में जो समस्याएं सामने आई हैं, उनके तत्काल समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। बच्चों का संदेश साफ है—स्कूल और हॉस्टल में जो कमी है, अब उस पर चुप्पी नहीं। जेन-अल्फा सुविधाओं को लेकर न सिर्फ जागरूक है, बल्कि अधिकारियों के सामने खुलकर अपनी बात रखना भी जानती है।