बरेली। अग्निवीर बनकर देश की सेवा करने का सपना देख रहे युवाओं की मजबूरी को ठगी का हथियार बनाने वाले गिरोह का कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पर्दाफाश किया है। आरोप है कि गिरोह मेडिकल में असफल अभ्यर्थियों को री-मेडिकल में पास कराने का भरोसा देकर उनसे 20 से 50 हजार रुपये तक वसूलता था। पुलिस ने लखनऊ निवासी राजेश तिवारी को गिरफ्तार किया है, जबकि उसके कथित साझेदार गजेंद्र सिंह की तलाश की जा रही है। आरोपी के कब्जे से फर्जी मोहर, मोबाइल और अभ्यर्थियों का ब्योरा दर्ज रजिस्टर बरामद हुआ है।
मिलिट्री अस्पताल के बाहर बिछा रहा था जाल, इंटेलिजेंस को लगी भनक
25 अगस्त को मिलिट्री इंटेलिजेंस से सूचना मिली कि रिसाला चौकी क्षेत्र में मिलिट्री अस्पताल के पास एक संदिग्ध व्यक्ति खुद को सेना का रिटायर्ड हवलदार बताकर अग्निवीर जनरल ड्यूटी के री-मेडिकल में असफल अभ्यर्थियों से संपर्क कर रहा है। वह रुपये लेकर उन्हें मेडिकल में पास कराने का दावा कर रहा था। सूचना मिलते ही दारोगा राजीव पटेल, कांस्टेबल संदीप राणा और रोहित राणा ने मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम के साथ घेराबंदी की। मौके से लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र के मुबारकपुर निवासी राजेश तिवारी को पकड़ लिया गया।
पिता सेना से रिटायर्ड, बेटे ने बना लिया फर्जी कैंटीन कार्ड
पूछताछ में राजेश ने पुलिस को बताया कि उसके पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं। वह जबलपुर में सेना भर्ती की तैयारी कराने के लिए कुछ समय तक अकादमी भी चला चुका है। इसी दौरान उसकी पहचान गजेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति से हुई। गजेंद्र खुद को सेना से जुड़ा बताता था, हालांकि राजेश उसके वास्तव में सैन्यकर्मी होने की पुष्टि नहीं कर सका। सेना में पुरानी भर्ती व्यवस्था बंद होने और अग्निवीर योजना लागू होने के बाद राजेश की अकादमी से होने वाली आमदनी प्रभावित हुई। इसके बाद उसने कथित तौर पर सेना का फर्जी कैंटीन पहचानपत्र तैयार कराया और खुद को रिटायर्ड हवलदार बताकर युवाओं को अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर कहता अफसर तक पहुंच गया तुम्हारा नंबर
जांच में सामने आया कि आरोपी का मिलिट्री अस्पताल के किसी डॉक्टर से कोई संपर्क नहीं था। इसके बावजूद वह फर्जी दस्तावेज, कूटरचित कॉल-अप लेटर और दूसरे अभ्यर्थियों के रेफरल लेटर दिखाकर युवाओं का भरोसा जीतता था। आरोप है कि मेडिकल में फेल अभ्यर्थी के संपर्क में आने के बाद उसका आरएमडीएस नंबर और अन्य जानकारी गजेंद्र सिंह को WhatsApp पर भेजी जाती थी। इसके बाद अभ्यर्थी से कहा जाता था कि उसकी जानकारी ‘सेना के अधिकारी’ तक पहुंचा दी गई है और री-मेडिकल में उसका काम हो जाएगा।
किसी से 20 तो किसी से 50 हजार, रकम में दोनों का था हिस्सा
पुलिस पूछताछ में राजेश ने गजेंद्र को इस पूरे खेल में अपना साझेदार बताया है। आरोप है कि अभ्यर्थियों से रकम मिलने के बाद राजेश अपना हिस्सा रखता था और बाकी धनराशि गजेंद्र के बताए बैंक खाते में भेजी जाती थी। पुलिस अब इस आर्थिक लेनदेन की कड़ियां खंगाल रही है।
मोबाइल ने खोला राज, अभ्यर्थी से मिले 40 हजार रुपये
राजेश के मोबाइल की जांच में पुलिस को कई अभ्यर्थियों के रेफरल लेटर, बैंक खाते से जुड़ी हिस्ट्री और WhatsApp चैट मिली हैं। पुलिस के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को दोपहर 2:44 बजे अंकित सिंह चौहान नाम के अभ्यर्थी की UPI आईडी से 40 हजार रुपये मिलने का रिकॉर्ड सामने आया है। अंकित का नाम आरोपी के पास मिले रजिस्टर में भी दर्ज था। मोबाइल में गजेंद्र सिंह के नाम से मिली WhatsApp चैट में अभ्यर्थियों के रेफरल फॉर्म भेजने और कथित तौर पर रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत भी मिली है। पुलिस ने संबंधित चैट के स्क्रीनशॉट सुरक्षित कर लिए हैं।
25 अगस्त को फिर शिकार की तलाश, इस बार खुद फंस गया
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह 25 अगस्त को मिलिट्री अस्पताल के आसपास ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश में पहुंचा था, जिन्हें री-मेडिकल में पास कराने का भरोसा देकर रुपये लिए जा सकें। मगर किसी नए अभ्यर्थी को जाल में फंसाने से पहले ही मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर कैंट पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस अब फरार गजेंद्र सिंह की भूमिका, उसके बैंक खातों, आरोपी के मोबाइल में मिले अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड और अब तक हुई कथित वसूली का ब्योरा खंगाल रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने कितने अग्निवीर अभ्यर्थियों को इसी तरीके से निशाना बनाया।