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बरेली। HDFC बैंक की सिविल लाइंस स्थित होम लोन शाखा में करोड़ों रुपये के लोन घोटाले का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों और सत्यापन एजेंसियों से जुड़े लोगों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर 12 लोगों को करीब 3.59 करोड़ रुपये का लोन दिला दिया गया। मामला खुलने के बाद बैंक के एरिया मैनेजर ने कोतवाली में शिकायत दी, जिसके आधार पर पुलिस ने बैंक कर्मचारी, लोन लेने वाले लोगों और सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों समेत 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

जनवरी 2022 से मार्च 2023 के बीच इन लोगों के नाम पर अलग-अलग होम लोन स्वीकृत किए गए। शुरुआत में सब कुछ सामान्य चलता रहा, लेकिन जब लोन की किस्तें समय से जमा नहीं हुईं तो बैंक ने दिए गए पते और दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई। यहीं से पूरा मामला संदिग्ध नजर आने लगा। बैंक की जांच में आरोप है कि कई लोन धारक अपने बताए पते पर मिले ही नहीं। कुछ पते अधूरे थे तो कुछ जगह आसपास के लोगों ने भी संबंधित व्यक्ति के वहां रहने की जानकारी से इनकार किया। इसके बाद बैंक ने पुराने दस्तावेजों और सत्यापन रिपोर्ट की जांच शुरू की तो फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।

12 नाम, करोड़ों का कर्ज

शिकायत में 12 लोगों के नाम पर स्वीकृत रकम का भी ब्योरा दिया गया है। इनमें ऐमन जैदी के नाम पर करीब 36.19 लाख, अजय कुमार पर 31.10 लाख, अमित कुमार पर 36.29 लाख, करिश्मा पर 35.88 लाख, लक्ष्मी देवी पर 24.51 लाख, आशीष पर 35.98 लाख और प्रवेश कुमार पर 33.49 लाख रुपये का लोन बताया गया है। वहीं प्रीति के नाम पर 30.43 लाख, रेखा पर 25.92 लाख, संजय कुमार पर 36.07 लाख, सरोज पर 32.32 लाख और सुमित कुमार पर करीब 80 हजार रुपये का लोन स्वीकृत होने की बात कही गई है। मामले में HDFC बैंक की होम लोन शाखा के सेल्स एग्जीक्यूटिव कुमार चेतन पर भी आरोप लगाया गया है। बैंक अधिकारी का कहना है कि इन सभी लोगों को लोन दिलाने की प्रक्रिया में कुमार चेतन की भूमिका रही। आरोप है कि लोन लेने वालों के दस्तावेज जुटाने से लेकर प्रक्रिया पूरी कराने तक उन्होंने मदद की।

सत्यापन रिपोर्ट ने बढ़ाया शक

बैंक के मुताबिक लोन धारकों के घर और ऑफिस का सत्यापन अलग-अलग एजेंसियों से कराया गया था। शिकायत में आरोप है कि सत्यापन करने वाले कर्मचारियों ने मौके की वास्तविक स्थिति की पड़ताल किए बिना सकारात्मक रिपोर्ट लगा दी। इनमें IP सिंह एंड एसोसिएट, Astute और Sanjay Bhargav Co. से जुड़े सत्यापनकर्ताओं के नाम शामिल हैं। बैंक ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों, गलत पतों और कथित मिलीभगत के जरिए बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह सामने आएगा कि दस्तावेज किसने तैयार किए, सत्यापन रिपोर्ट कैसे लगी और 3.59 करोड़ रुपये की लोन रकम आखिर कहां गई।

इन आरोपियों पर दर्ज हुई एफआईआर

कोतवाली पुलिस ने ऐमन जैदी, अजय कुमार, अमित कुमार, करिश्मा, लक्ष्मी देवी, आशीष, प्रवेश कुमार, प्रीति, रेखा, संजय कुमार, सरोज कुमार, चेतन कुमार सेल्स एग्जेक्यूटिव, आईपी सिंह एंड एसोसिएट सत्यापन करने वाली एजेंसी, ऐसट्यूट सत्यापन करने वाली एजेंसी, संजय, आईपी सिंह एंड एसोसियट सत्यापन कर्ता कर्मचारी आईपी सिंह एंड एसोसिएट एजेंसी, रफीक सत्यापन कर्ता, सूरजपाल, सोहेल राम और दीपक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

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