बरेली। करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए ऐसा खेल रचा गया कि जिंदा आदमी को कागजों में मार डाला और गांव की एक महिला उसकी फर्जी बेटी बनकर पूरी जमीन की वारिस बन बैठी। आरोप है कि पहले फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया, फिर जमीन अपने नाम कराई, बैंक में बंधक रखकर लोन लिया और बाद में उसके बैनामे भी कर दिए। असली मालिक को खेल का पता चला तो समझौते के नाम पर 3.50 लाख का चेक थमाया गया, लेकिन वह भी बाउंस हो गया। अब जमीन वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। कैंट पुलिस ने पूर्व प्रधान समेत 10 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।
कैंट के वभिया गांव निवासी जानकी पुत्र दीपचंद अविवाहित हैं और उनकी कोई संतान नहीं है। जानकी का आरोप है कि कुछ समय के लिए उनके तीर्थयात्रा पर जाने को गांव की रामवती पत्नी महेंद्र पाल ने मौका बना लिया। करोड़ों की पैतृक जमीन हथियाने के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान रामपाल से मिलीभगत की गई और जिंदा जानकी को कागजों में मृत दिखाकर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार करा दिया गया।
जिंदा जानकी मृत, रामवती बन बैठी उनकी बेटी
आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार होने के बाद कहानी में नया रिश्ता गढ़ा गया। रामवती ने तत्कालीन चकबंदी सदस्य सुल्तान सिंह समेत अन्य लोगों से मिलीभगत कर खुद को जानकी की सगी बेटी और वारिस दिखा दिया। दो जुलाई 2004 को चकबंदी के कागजों से जानकी का नाम हटाकर रामवती का नाम चढ़ा दिया गया। जबकि जानकी का कहना है कि रामवती से उनका कोई खून का रिश्ता तक नहीं है। फर्जीवाड़े का पता चलते ही जानकी ने जमीन बचाने की लड़ाई शुरू की। करीब नौ साल बाद 15 जनवरी 2013 को रामवती का नाम खतौनी से हटा और जानकी का नाम फिर दर्ज हुआ। मगर इन नौ वर्षों के दौरान जमीन को लेकर ऐसा जाल बुना जा चुका था, जिसकी गांठें अब पुलिस खोल रही है।
60 हजार का लोन, करोड़ों की जमीन बैंक में बंधक
नाम चढ़ने के बाद रामवती ने 20 अक्टूबर 2011 को उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की बरेली शाखा से मुर्गी पालन के नाम पर 60 हजार रुपये का लोन लिया। आरोप है कि लोन के लिए जानकी की जमीन ही बैंक में बंधक रख दी गई। 2025 तक 60 हजार रुपये की रकम ब्याज समेत करीब 3.30 लाख रुपये पहुंच गई। जमीन पर बैंक का बंधक आज भी बरकरार है। यही नहीं, आरोप है कि 14 मई 2012 को जमीन के बैनामे ओम प्रकाश, अजय पाल और विजेंद्र के नाम कर दिए गए। शिकायत में इन बैनामों की कीमत करीब 20.88 लाख रुपये बताई गई है। दस्तावेज लेखक राजकुमार सक्सेना उर्फ राजू और गवाह नितिन पर भी इस खेल में साथ देने का आरोप है।
बैनामे पर बैनामे, जमीन पर कब्जा और खनन का आरोप
जानकी का आरोप है कि जमीन तीन लोगों तक ही नहीं रुकी। इसके हिस्से आगे भी बेचे जाते रहे। कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा जमा लिया। इतना ही नहीं, कृषि भूमि पर अवैध खनन कर उसे नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है। वापस लौटने के बाद जानकी को पता चला कि जिस जमीन को वह अपनी पैतृक संपत्ति समझ रहे थे, उस पर कागजों में मालिक बदल चुके हैं, बैंक का कर्ज चढ़ चुका है और बैनामे भी हो चुके हैं। उन्होंने रामवती और उसके परिवार से जमीन वापस करने, बैंक का कर्ज चुकाने और बैनामे खत्म कराने को कहा।
समझौता हुआ, 3.50 लाख का चेक मिला, वह भी बाउंस
विवाद बढ़ने पर 19 अगस्त 2025 को नोटरी पर समझौता हुआ। जानकी का दावा है कि इसमें फर्जी विरासत के सहारे नाम चढ़वाने की बात भी मानी गई। बैंक का कर्ज खत्म कराने के लिए 3.50 लाख रुपये का चेक दिया गया। मगर चेक बैंक पहुंचा तो खाते में रकम ही नहीं थी और चेक बाउंस हो गया। जानकी का आरोप है कि इसके बाद भी न बैंक का कर्ज चुकाया गया, न जमीन बंधक से छूटी और न बैनामे खत्म हुए। जमीन वापस मांगने पर रामवती, उसके पति महेंद्र पाल और ससुर रामपाल ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
20 साल पुराने खेल पर रिपोर्ट, अब खुलेगी कागजों की पूरी कहानी
जानकी ने एसएसपी अनुराग आर्य से शिकायत की। इसके बाद कैंट पुलिस ने रामवती, महेंद्र पाल, तत्कालीन ग्राम प्रधान रामपाल, तत्कालीन चकबंदी सदस्य सुल्तान सिंह, ओम प्रकाश, अजय पाल, विजेंद्र, रामभजन, नितिन और दस्तावेज लेखक राजकुमार सक्सेना उर्फ राजू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र कैसे बना, बिना खून के रिश्ते के महिला उसकी बेटी कैसे बनी, जमीन पर उसका नाम कैसे चढ़ा और उसी जमीन पर लोन से लेकर बैनामों तक का खेल कैसे चलता रहा। पुलिस इन सभी कड़ियों की जांच कर रही है।