पुणे। साइबर ठग अब भरोसेमंद हस्तियों के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर लोगों की जेब तक पहुंच रहे हैं। पुणे में जालसाजों ने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा का कथित डीपफेक वीडियो बनाकर एक निजी अस्पताल की 38 वर्षीय नर्स को निवेश के जाल में फंसा लिया। मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर महिला से लाखों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। रकम निकालने की कोशिश की तो और पैसे मांगे गए, जिसके बाद ठगी का खुलासा हुआ।

सोशल मीडिया पर दिखे रतन टाटा, एक क्लिक और शुरू हुआ ठगी का खेल

अंबेगांव निवासी महिला को सोशल मीडिया पर रतन टाटा का एक वीडियो दिखाई दिया। पुलिस के मुताबिक, यह डीपफेक वीडियो था। इसमें कथित तौर पर एक निवेश योजना से जुड़ने और निवेश कर बेहतर रिटर्न पाने का संदेश दिया जा रहा था। रतन टाटा का चेहरा देखकर महिला को वीडियो पर भरोसा हो गया और उसने उसमें दिए लिंक पर क्लिक कर दिया। लिंक खुलने के बाद महिला से व्यक्तिगत जानकारी भरवाई गई और फिर एक ऐप डाउनलोड कराया गया।

फोन पर मिला ‘मुनाफे’ का भरोसा, फिर खातों में ट्रांसफर होने लगे रुपये

आरोप है कि इसके बाद मनुमोहन नाम बताने वाले व्यक्ति ने महिला को फोन किया। उसने अच्छे रिटर्न का भरोसा देते हुए कथित तौर पर वर्ल्ड ट्रेडेक्स कंपनी में निवेश करने को कहा। महिला ने भरोसा कर साइबर ठगों की ओर से बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में रुपये भेजने शुरू कर दिए। एफआईआर के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2024 से 13 जून 2025 के बीच 11 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 4,09,100 रुपये ट्रांसफर किए गए।

फर्जी पोर्टल पर दिखता रहा भारी मुनाफा

ठगों ने महिला को एक ऑनलाइन पोर्टल का लिंक भी दिया था। महिला जब पोर्टल खोलती तो उसमें उसके निवेश पर भारी मुनाफा दिखाई देता था। स्क्रीन पर लगातार बढ़ती रकम देखकर उसे लगता रहा कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है। असली खेल उस समय सामने आया, जब महिला ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की। आरोप है कि पैसे वापस देने के बजाय जालसाजों ने उससे और रकम जमा करने को कहा।

पैसे मांगे तो हुआ शक, साइबर पुलिस तक पहुंचा मामला

बार-बार अतिरिक्त रकम की मांग किए जाने पर महिला को ठगी का अहसास हुआ। उसने पुणे शहर की साइबर पुलिस से शिकायत की। शिकायत की जांच के बाद भारती विद्यापीठ पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Deepfake बना नया साइबर हथियार, बड़े चेहरों से जीत रहे भरोसा

साइबर अपराध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक का इस्तेमाल नई चुनौती बनता जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कथित डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल कर लोगों से ठगी किए जाने का मामला भी सामने आ चुका है। ऐसे मामलों में किसी सेलिब्रिटी, उद्योगपति या बड़े अधिकारी के वीडियो में निवेश की सलाह दिखाई देने पर उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने और बिना सत्यापन किसी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए।

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