छिंदवाड़ा/पांढुर्ना। अप्रैल में ही आसमान से आग बरस रही है। 42 डिग्री तापमान और लू के थपेड़ों के बीच पांढुर्ना प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए नर्सरी से 5वीं तक के सभी स्कूलों पर ताला लगा दिया है। कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के आदेश पर 30 अप्रैल 2026 तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। वहीं, पड़ोसी छिंदवाड़ा में राहत न मिलने से अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है।
42°C की तपिश ने रोकी पढ़ाई, बच्चों की सेहत को लेकर बड़ा कदम
पांढुर्ना जिले में लगातार बढ़ते तापमान ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। पारा 42 डिग्री के करीब पहुंचते ही हालात गंभीर हो गए। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में और भीषण गर्मी की चेतावनी दी है। दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाएं छोटे बच्चों के लिए खतरे की घंटी बन चुकी हैं। इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को तत्काल राहत देने का फैसला लिया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और लू से बचाना प्राथमिकता है, इसलिए स्कूल बंद करना जरूरी था।
सरकारी और प्राइवेट सभी स्कूलों पर लागू आदेश
जारी आदेश के अनुसार यह अवकाश जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। हालांकि शिक्षकों और स्टाफ को नियमित रूप से स्कूल आना होगा और शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्य जारी रखे जाएंगे। गौरतलब है कि इससे पहले प्रशासन ने स्कूलों का समय बदलकर सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया था, लेकिन तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। आखिरकार बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए छुट्टी का निर्णय लेना पड़ा।
छिंदवाड़ा में वही हालात, फिर भी राहत नहीं… अभिभावकों में उबाल
दूसरी तरफ छिंदवाड़ा जिले में हालात पांढुर्ना जैसे ही हैं, लेकिन यहां अब तक स्कूल बंद करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। प्रशासन ने केवल समय में बदलाव किया है—सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 तक। इस बीच सबसे बड़ी परेशानी छुट्टी के बाद घर लौटते बच्चों को हो रही है। तेज धूप और लू के बीच कई बच्चों को 1:30 से 2 बजे तक सड़कों पर रहना पड़ता है। इस दौरान तापमान और गर्म हवाओं का असर चरम पर होता है, जिससे बच्चों के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।
परीक्षाओं का दबाव, बच्चों की मजबूरी
छिंदवाड़ा में इन दिनों कई निजी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य है और स्कूल बंद करने की संभावना कम नजर आ रही है। अभिभावकों का कहना है कि इतनी भीषण गर्मी में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा है। कई बच्चे धूप और गर्मी के कारण बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन परीक्षा के दबाव में उन्हें जाना ही पड़ रहा है। यह स्थिति बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
“पांढुर्ना जैसा फैसला यहां भी हो”… उठी एक जैसी मांग
पांढुर्ना में स्कूल बंद होने के फैसले के बाद छिंदवाड़ा में भी आवाजें तेज हो गई हैं। अभिभावक, सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग प्रशासन से तुरंत निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब पड़ोसी जिले में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इतना बड़ा कदम उठाया जा सकता है, तो छिंदवाड़ा में भी वही नीति लागू होनी चाहिए। प्रशासन की देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा, डॉक्टरों ने भी दी चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 40 डिग्री से अधिक तापमान में छोटे बच्चों का शरीर जल्दी प्रभावित होता है। हीट स्ट्रोक, उल्टी, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि दोपहर के समय बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें, पर्याप्त पानी पिलाएं और हल्के कपड़े पहनाएं। ऐसे में स्कूलों का संचालन बच्चों की सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
अब छिंदवाड़ा प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
पांढुर्ना के फैसले के बाद अब सभी की नजरें छिंदवाड़ा प्रशासन पर हैं। सवाल यह है कि क्या यहां भी बच्चों को राहत मिलेगी या फिर उन्हें इसी तरह तपती धूप में स्कूल जाना पड़ेगा। अगर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो अभिभावकों का विरोध और तेज हो सकता है। फिलहाल बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।