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नई दिल्ली/तेहरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर हालात बने तो उसके अंत की शर्तें वही तय करेगा। ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली ने एक इंटरव्यू में साफ शब्दों में कहा कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को मान्यता देंगे और सैन्य दबाव पूरी तरह खत्म करेंगे।

‘परमाणु अधिकार मानो, तभी आगे बढ़ेगी बातचीत’

ईरानी राजदूत ने दो टूक कहा कि कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन बातचीत की सफलता कुछ स्पष्ट शर्तों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि विरोधी देशों को ईरान के परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के अधिकार को स्वीकार करना होगा। साथ ही, सैन्य कार्रवाई पर रोक और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई भी जरूरी शर्तों में शामिल है। राजदूत के मुताबिक, “हम ऐसी शांति नहीं चाहते जो केवल अस्थायी हो, बल्कि स्थायी और भरोसेमंद समाधान चाहिए।”

‘युद्ध-सीजफायर-बातचीत का चक्र नहीं चाहिए’

ईरान ने पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वह बार-बार युद्ध और सीजफायर के चक्र में फंसना नहीं चाहता। राजदूत ने साफ किया कि मौजूदा स्थिति में ईरान युद्ध और शांति—दोनों के लिए तैयार है, लेकिन उसकी प्राथमिकता स्थायी शांति है। उनका कहना है कि अस्थायी सीजफायर अक्सर विरोधियों को फिर से ताकत जुटाने का मौका देता है, जिससे संघर्ष दोबारा भड़क सकता है।

भारत की भूमिका पर भरोसा, BRICS में उम्मीद

ईरान ने भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक ताकत बताया है। BRICS की अध्यक्षता कर रहे भारत से ईरान को उम्मीद है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देगा। राजदूत ने कहा कि भारत की भूमिका संतुलन बनाने और संवाद को आगे बढ़ाने में अहम हो सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट: भारत के जहाजों को लेकर क्या कहा?

हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटनाओं को लेकर चिंता जताई गई थी। इस पर ईरान ने स्पष्ट किया कि वह समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों का सम्मान करता है। राजदूत ने कहा कि इस जलमार्ग में किसी भी असुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है और कई भारतीय जहाज सुरक्षित गुजर चुके हैं।

चाबहार पोर्ट: भारत के लिए ‘गेमचेंजर’

ईरान ने चाबहार पोर्ट को भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताया है। राजदूत के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केवल भारत और ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद है। चाबहार के जरिए भारत को मध्य एशिया तक सीधी पहुंच मिलती है, जो व्यापार और कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान ने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट को किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद आगे बढ़ाया जाएगा।

‘स्थायी शांति के लिए जड़ पर वार जरूरी’

ईरान का मानना है कि केवल सीजफायर से समस्या हल नहीं होगी। राजदूत ने कहा कि स्थायी शांति के लिए संघर्ष की जड़ को खत्म करना जरूरी है, नहीं तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। राजदूत ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान मासूम लोगों को होता है। उन्होंने बताया कि बच्चों की मौतों को याद दिलाने के लिए प्रतीकात्मक कदम उठाए गए, ताकि दुनिया इस दर्द को समझ सके।

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