up newsफूड कोर्ट

बरेली। स्मार्ट सिटी के फूड कोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर चल रहे विवाद में अब अग्नि सुरक्षा का मुद्दा भी जुड़ गया है। शासन को भेजी गई नई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुष्ठ आश्रम परिसर में निर्माणाधीन बहुमंजिला फूड कोर्ट एवं व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण बिना फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और आवश्यक स्वीकृतियों के कराया जा रहा है।

रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार महरोत्रा, शहर अध्यक्ष मनोज कपूर और भाजपा पार्षद कपिल कांत सक्सेना ने शासन को भेजी शिकायत में कहा है कि किसी भी व्यावसायिक भवन के निर्माण से पहले फायर एनओसी, अग्नि सुरक्षा संबंधी स्वीकृत योजना, आर्किटेक्ट का प्रमाणन तथा सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत मानचित्र अनिवार्य होता है। आरोप है कि इन औपचारिकताओं के बिना ही निर्माण कार्य कराया गया, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई है।

घनी आबादी के बीच निर्माण पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्माणाधीन परिसर घनी आबादी और व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र के बीच स्थित है। ऐसे में यदि भवन निर्माण के दौरान अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया तो भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी आधार पर निर्माण से जुड़ी सभी स्वीकृतियों की जांच कराए जाने की मांग की गई है।

2018 के शासनादेश का दिया हवाला

शिकायत में वर्ष 2018 के शासनादेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी अधिकारी से संबंधित शिकायत की जांच उसी अधिकारी अथवा उसके अधीनस्थ स्तर पर नहीं कराई जा सकती। निष्पक्ष जांच के लिए कम से कम एक स्तर वरिष्ठ अधिकारी को जांच सौंपी जानी चाहिए। शिकायतकर्ताओं ने इसी व्यवस्था के तहत स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।

मंडलायुक्त स्तर पर मांगी गई रिपोर्ट

फूड कोर्ट प्रकरण पहले से ही शासन स्तर पर जांच के दायरे में है। मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला पहुंचने के बाद राज्य मिशन निदेशक ने मंडलायुक्त एवं बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ फायर एनओसी, मानचित्र स्वीकृति और अन्य वैधानिक अनुमतियों की भी पड़ताल की जाएगी।

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