बरेली। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बुधवार को बरेली पहुंच गए। सर्किट हाउस पहुंचने के बाद उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की। इसके बाद वह कलक्ट्रेट सभागार में कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों, राजस्व मामलों और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे। बैठक को लेकर प्रशासनिक अमले में सुबह से ही हलचल रही और सभी विभाग अपने-अपने आंकड़ों के साथ तैयार नजर आए।
37 महत्वाकांक्षी योजनाओं का होगा रिपोर्ट कार्ड पेश
डिप्टी सीएम की समीक्षा बैठक में वर्ष 2017 से अब तक संचालित 37 प्रमुख योजनाओं की प्रगति, बजट व्यय और लाभार्थियों का पूरा ब्योरा रखा जाएगा। अधिकारियों को योजनाओं की वित्तीय और भौतिक प्रगति के अद्यतन आंकड़ों के साथ प्रस्तुत होने के निर्देश दिए गए हैं। कई विभागों ने देर रात तक रिपोर्टों को अंतिम रूप देकर लाभार्थियों और बजट उपयोग का मिलान किया।
अधूरी परियोजनाओं पर होगी सीधी जवाबदेही
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में उन परियोजनाओं की भी समीक्षा होगी जो तय समय सीमा के बावजूद पूरी नहीं हो सकीं। लक्ष्य से पीछे चल रहे विभागों से देरी के कारण पूछे जाएंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। साथ ही यह भी परखा जाएगा कि योजनाओं के लिए मिले बजट का कितना उपयोग हुआ और निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले विभागों का प्रदर्शन कैसा रहा।
इन योजनाओं पर रहेगा खास फोकस
समीक्षा के दायरे में आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना समेत कुल 37 महत्वाकांक्षी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा विभागवार विकास परियोजनाओं और लंबित कार्यों की भी समीक्षा होगी।
शिकायत निस्तारण का भी मांगा जाएगा हिसाब
डिप्टी सीएम कार्यालय में जनवरी 2026 से अब तक प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की स्थिति भी बैठक का अहम एजेंडा है। सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है कि कितनी शिकायतों का समय पर समाधान किया गया और कितने मामले अभी लंबित हैं। अधिकारियों को इस संबंध में भी जवाब देना होगा।
लापरवाही मिलने पर हो सकती है कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि समीक्षा के दौरान यदि किसी विभाग की प्रगति संतोषजनक नहीं मिली या शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। ऐसे में यह समीक्षा बैठक कई विभागों के लिए परीक्षा से कम नहीं मानी जा रही है।