बरेली। शहर में जमीन के बढ़ते दाम के बीच तालाब भी कब्जे और निर्माण की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। अब फाइक इंक्लेव में तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग किए जाने का मामला सामने आने के बाद नगर निगम रिकॉर्ड खंगालने में जुट गया है। फाइक इंक्लेव में जमीन को लेकर पहले भी सरकारी चकरोड और तालाबों की जांच हो चुकी है, जिसमें नजूल की जमीन सामने आने की बात कही गई थी। अब तालाब की भूमि पर प्लॉटिंग का मामला सामने आने से यह इलाका एक बार फिर सरकारी जमीनों की जांच के केंद्र में आ गया है।


फाइक इंक्लेव में तालाब पर प्लॉटिंग! रिकॉर्ड से होगा जमीन का हिसाब

नगर निगम के सामने आए मामलों में फाइक इंक्लेव कॉलोनी का प्रकरण अहम माना जा रहा है। यहां तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग किए जाने की बात कही जा रही है। नगर निगम अब राजस्व और अपने अभिलेखों से जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान करा रहा है। जांच में यह देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में तालाब का कुल रकबा कितना है, मौके पर कितना क्षेत्रफल बचा है और कितनी जमीन निर्माण अथवा प्लॉटिंग की जद में आ चुकी है।

पहले भी खुल चुकी जमीन की परतें, चकरोड-तालाब के साथ सामने आई थी नजूल भूमि

फाइक इंक्लेव क्षेत्र में सरकारी जमीन का मामला नया नहीं है। इससे पहले भी यहां सरकारी चकरोड और तालाबों की जमीन को लेकर जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान क्षेत्र में नजूल की जमीन सामने आने की बात भी कही गई थी। अब तालाब की भूमि पर प्लॉटिंग की बात सामने आने के बाद पुराने अभिलेख और मौजूदा स्थिति फिर महत्वपूर्ण हो गई है। निगम की जांच से साफ होगा कि तालाब की जमीन की वर्तमान स्थिति क्या है और उस पर किसी तरह का अतिक्रमण हुआ है या नहीं।

कागजों में तालाब, जमीन पर खड़ी हो गईं इमारतें और स्कूल

नगर निगम के रिकॉर्ड में शहर में 150 से अधिक तालाब दर्ज बताए गए हैं, लेकिन इनमें बड़ी संख्या अतिक्रमण की चपेट में है। हालात यह हैं कि कहीं तालाब की जमीन पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी होने की बात सामने आई है तो कहीं स्कूल भवन तक बन चुके हैं। आबादी बढ़ने और बेतरतीब निर्माण के बीच कई तालाब चारों तरफ से घिर गए और उनका वास्तविक क्षेत्रफल लगातार सिमटता चला गया।

हरूनगला में चार, जौहरपुर में छह और खलीलपुर में तीन तालाब

नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक हरूनगला में चार, जौहरपुर में छह और खलीलपुर में तीन तालाब हैं। कंजादासपुर में तालाब की जमीन से आंशिक कब्जा हटाने की कार्रवाई भी की जा चुकी है। पिछले दिनों जगतपुर में भी तालाब की जमीन पर कब्जे की बात सामने आई थी। ऐसे मामलों ने साफ कर दिया है कि तालाबों पर अतिक्रमण किसी एक कॉलोनी या इलाके तक सीमित नहीं है।

अब बनेगा तालाबों का ‘कब्जा नक्शा’, एक-एक जमीन की होगी पड़ताल

नगर निगम ने शहर के तालाबों की सूची तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। इसमें रिकॉर्ड में दर्ज तालाब, उनका मूल क्षेत्रफल, वर्तमान स्थिति, मौके पर बची जमीन और अतिक्रमण का ब्योरा जुटाया जाएगा। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी के मुताबिक तालाबों की जमीन पर कब्जों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए सूची तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर अतिक्रमण वाले स्थान चिह्नित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एक्शन की तैयारी, कब्जों पर चलेगा अभियान

तालाब और अन्य सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर अब नगर निगम अभियान चलाने की तैयारी में है। कब्जे वाली जमीनों को चिह्नित कराया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निगम की इस कवायद से वर्षों से तालाबों की जमीन पर जमे कब्जों पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है।
तालाबों का सिकुड़ना सिर्फ सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला नहीं है। इसका सीधा असर भूजल स्तर, वर्षा जल संचयन और शहर की जल निकासी व्यवस्था पर भी पड़ता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि रिकॉर्ड खंगालने के बाद फाइक इंक्लेव समेत दूसरे इलाकों में सामने आने वाले अतिक्रमण पर नगर निगम कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

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