RPF की जांच में सामने आया टिकट दलाली का नेटवर्क

बरेली। तत्काल श्रेणी के रेलवे टिकटों की कथित दलाली के मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की जांच में अहम खुलासा हुआ है। RPF पोस्ट बरेली में दर्ज मुकदमा संख्या 649/26, धारा 143 रेलवे एक्ट के तहत चल रही जांच में रविन्द्र कुमार साहू नामक व्यक्ति के बयान दर्ज किए गए। जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर RPF ने उसे भी मुकदमे में आरोपी के रूप में संबद्ध किया है।

मुंबई निवासी युवक के बयान से खुली पूरी कहानी

RPF के मुताबिक रविन्द्र कुमार साहू, पुत्र उमेश कुमार साहू, उम्र करीब 24 वर्ष, मुंबई में रहता है और उसका मूल निवास बिहार के मधुबनी जिले में है। मुकदमे की जांच के सिलसिले में उसे सम्मन भेजा गया था। RPF पोस्ट बरेली पहुंचने के बाद उसके बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने तत्काल टिकटों की बुकिंग और आगे बेचने से जुड़ी अहम जानकारी दी।

पीतांबरपुर आरक्षण केंद्र के कर्मचारी से मिलीभगत का आरोप

बयान के अनुसार, 4 जुलाई 2026 को पीतांबरपुर रेलवे आरक्षण केंद्र पर तैनात मुख्य सहायक आरक्षण पर्यवेक्षक शैलेंद्र दुबे के साथ कथित मिलीभगत कर तत्काल श्रेणी के टिकट जारी कराए गए। आरोप है कि इन टिकटों को आगे बुकिंग एजेंट को कमीशन लेकर बेचने की योजना थी।

व्हाट्सऐप संदेश भेजकर कराई गई टिकट बुकिंग

RPF को दिए बयान के मुताबिक रविन्द्र ने अपने व्हाट्सऐप नंबर से शैलेंद्र दुबे के मोबाइल पर दो व्हाट्सऐप संदेश भेजे थे। इन संदेशों के आधार पर 5 जुलाई 2026 की यात्रा के लिए तत्काल श्रेणी के दो टिकट जारी कराने की बात सामने आई है। RPF ने जांच में इन डिजिटल संदेशों और टिकटों को अहम साक्ष्य माना है।

दो तत्काल टिकटों की कुल कीमत 16,340 रुपये

जांच में सामने आए टिकट विवरण के अनुसार दोनों टिकटों की कुल कीमत 16,340 रुपये थी। इनमें एक टिकट 3 AC श्रेणी का था, जिसकी कीमत 11,560 रुपये बताई गई है, जबकि दूसरा स्लीपर श्रेणी का टिकट 4,780 रुपये का था।

एक टिकट का फोटो भेजा, दूसरा पकड़े जाने से पहले रह गया

बयान के मुताबिक एक टिकट जारी होने के बाद उससे संबंधित मूल टिकट का फोटो बुकिंग कर्मचारी द्वारा रविन्द्र को भेज दिया गया था। वहीं दूसरे टिकट के संबंध में आरोप है कि वह टिकट जारी तो कर दिया गया, लेकिन उसका फोटो भेजे जाने से पहले ही RPF की कार्रवाई में मामला पकड़ में आ गया।

आगरा के बुकिंग एजेंट को टिकट बेचने की बात

RPF के अनुसार, पूछताछ में रविन्द्र ने बताया कि टिकट आगे किसी आगरा निवासी बुकिंग एजेंट को बेचने के उद्देश्य से जारी कराए गए थे। यानी जांच में केवल टिकट बनवाने ही नहीं, बल्कि उन्हें आगे कमीशन के बदले बेचने की कथित योजना भी सामने आई है।

RPF ने साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे में जोड़ा

RPF निरीक्षक मयंक चौधरी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक आरोपी के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर रविन्द्र कुमार साहू की संलिप्तता धारा 143(1) रेलवे एक्ट के तहत पाई गई। इसके बाद उसे मुकदमा संख्या 649/26 में 20 अगस्त 2026 को रात 8:45 बजे संबद्ध किया गया।

जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका अहम

पूरे मामले में व्हाट्सऐप संदेश, मोबाइल नंबर, टिकट विवरण, PNR और आरक्षण केंद्र से जुड़े रिकॉर्ड जांच के महत्वपूर्ण बिंदु बन सकते हैं। RPF की जांच से यह भी स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि टिकट बुकिंग में कथित मिलीभगत कितने स्तर तक थी और इसमें अन्य लोग या एजेंट भी शामिल थे या नहीं।

RPF की कार्रवाई से तत्काल टिकटों की दलाली पर सवाल

इस कार्रवाई ने रेलवे आरक्षण केंद्रों से तत्काल टिकटों की बुकिंग और उन्हें कमीशन लेकर आगे बेचने की कथित व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल RPF की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होने की बात कही गई है।

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