कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर के त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में सामने आए डबल मर्डर केस ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जिस घर में बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहीं अब मातम पसरा है। एक पिता ने अपनी ही 11 साल की जुड़वा बेटियों की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने खुद पुलिस को फोन कर बुलाया, जिससे इस खौफनाक सच का पर्दाफाश हुआ। इस पूरे मामले ने न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आरोपी की मानसिकता और उसके खतरनाक प्लानिंग की परतें भी खोल दी हैं।
हर कमरे में कैमरा, लेकिन रिश्तों में अंधेरा
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह यह है कि आरोपी शशिरंजन ने अपने फ्लैट के लगभग हर हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे। केवल पत्नी के कमरे और बाथरूम को ही इससे अलग रखा गया था। ड्राइंग रूम में टीवी के नीचे एक मॉनिटर लगा था, जहां से वह पूरे घर की गतिविधियों पर नजर रखता था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि परिवार पर नजर रखने की मानसिकता का हिस्सा था। यह पहलू आरोपी के असामान्य व्यवहार की ओर इशारा करता है, जो आगे चलकर एक भयावह अपराध में बदल गया।
कार्टून से शुरू हुआ विवाद, मौत पर खत्म हुई रात
17 अप्रैल की रात इस खौफनाक घटना की शुरुआत हुई। दोनों बेटियां टीवी पर कार्टून देख रही थीं। पिता ने टीवी बंद करने को कहा, लेकिन बच्चियों ने मना कर दिया। गुस्से में आकर उसने फिल्म दिखाने का लालच दिया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो वह चिल्लाने लगा। माहौल बिगड़ता देख पत्नी रेशमा अपने छोटे बेटे को लेकर कमरे में चली गई। वहीं दोनों बेटियां पिता के कमरे में सोने चली गईं सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, आरोपी कुछ देर तक बच्चियों से सामान्य बातचीत करता रहा। वह बीच-बीच में मोबाइल भी देखता रहा। फिर अचानक कमरे की लाइट बंद हुई… और उसी अंधेरे में उसने अपनी ही बेटियों की हत्या कर दी।
पहले गला दबाया, फिर चापड़ और हथौड़े से वार
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जो खुलासा किया, वह और भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उसने बताया कि पहले उसने दोनों बच्चियों का गला दबाया, फिर चापड़ से उनके गले पर वार किया और हथौड़े से चोट पहुंचाई। यह पूरी घटना किसी आवेश में नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई लगती है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चापड़ और हथौड़ा बरामद कर लिया है। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के अनुसार, आरोपी ने हत्या की बात कबूल कर ली है, लेकिन उसने अब तक इस खौफनाक कदम के पीछे की स्पष्ट वजह नहीं बताई है।
500 रुपये में खरीदा था मौत का हथियार
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने मूलगंज बाजार से मात्र 500 रुपये में चापड़ खरीदा था। उसने इसे बैग में छिपाकर घर लाया और अलमारी में रख दिया। सबसे डराने वाली बात यह है कि वह कई बार पहले भी अपनी बेटियों की हत्या की साजिश बना चुका था। यानी यह अपराध अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से उसके दिमाग में पल रहा था।
पत्नी पर भी कर चुका था जानलेवा हमला
पत्नी रेशमा ने पुलिस को बताया कि यह पहली बार नहीं था जब आरोपी ने हिंसा की हद पार की हो। करीब दो साल पहले वह शराब के नशे में घर आया और विवाद के दौरान उस पर चाकू से हमला कर दिया था। उस समय उसके हाथ में चोट आई थी। एक साल पहले भी उसने चाकू से हमला किया था, हालांकि उस बार रेशमा बच गई थी। लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया, जिसका नतीजा अब इस भयानक रूप में सामने आया।
नशे का आदी और गुस्सैल था आरोपी
परिवार के अनुसार, आरोपी शशिरंजन नशे का आदी था और बेहद गुस्सैल स्वभाव का था। पति-पत्नी के रिश्ते भी लंबे समय से खराब चल रहे थे। दोनों अलग-अलग कमरों में रहते थे। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे मामलों में लंबे समय तक दबा गुस्सा, नशे की लत और असामान्य व्यवहार मिलकर व्यक्ति को खतरनाक बना देते हैं। यह मामला भी उसी का एक उदाहरण माना जा रहा है।
खुद पुलिस को किया फोन, फिर हुआ खुलासा
हत्या के बाद आरोपी ने खुद पुलिस को फोन कर सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो अंदर का मंजर देख हर कोई सन्न रह गया। दोनों बच्चियों के शव कमरे में पड़े थे और घर में खामोशी छाई हुई थी। पुलिस ने तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। साथ ही फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए।
मातम में डूबा परिवार, मासूम भाई की हालत खराब
इस घटना के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। मां रेशमा और छह साल का बेटा गहरे सदमे में हैं। परिवार के लोग भी इस घटना को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि एक पिता ऐसा भी कर सकता है। पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार सामान्य दिखता था, लेकिन घर के अंदर क्या चल रहा था, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
पुलिस की जांच जारी, वजह अब भी रहस्य
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपी से पूछताछ जारी है, ताकि हत्या की असली वजह सामने आ सके। यह मामला न सिर्फ एक जघन्य अपराध है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल भी है—क्या हम अपने आसपास हो रही मानसिक और पारिवारिक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं?