बढ़ती उम्र में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। अक्सर लोग ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों की वजह, लक्षण और इलाज पूरी तरह अलग हैं।
नई दिल्ली। हड्डियों और जोड़ों में दर्द होने पर अधिकांश लोग इसे सामान्य गठिया या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस दो अलग-अलग बीमारियां हैं, जिन्हें लेकर लोगों में काफी भ्रम रहता है। एक बीमारी हड्डियों को कमजोर करती है, जबकि दूसरी जोड़ों को नुकसान पहुंचाती है।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस?
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व (बोन डेंसिटी) धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं तथा मामूली चोट लगने पर भी टूट सकती हैं। बढ़ती उम्र, महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव, कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, धूम्रपान और शराब का सेवन इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
क्या है ऑस्टियोअर्थराइटिस?
ऑस्टियोअर्थराइटिस एक जोड़ों से जुड़ी बीमारी है। इसमें जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है। कार्टिलेज के खराब होने पर हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं, जिससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी होती है। मोटापा, पुरानी चोट और जोड़ों पर अधिक दबाव इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।
लक्षणों में भी है बड़ा अंतर
ऑस्टियोपोरोसिस को ‘साइलेंट डिजीज’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को बीमारी का पता तब चलता है जब मामूली चोट में हड्डी टूट जाती है। समय के साथ पीठ झुकना और लगातार कमर दर्द इसके संकेत हो सकते हैं। वहीं ऑस्टियोअर्थराइटिस में घुटनों, कूल्हों, हाथों और रीढ़ के जोड़ों में दर्द, अकड़न, सूजन और मूवमेंट में परेशानी होती है। सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न महसूस होना और जोड़ों से आवाज आना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं।
कैसे होती है पहचान?
ऑस्टियोपोरोसिस की जांच के लिए डॉक्टर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट या डेक्सा स्कैन कराने की सलाह देते हैं। वहीं ऑस्टियोअर्थराइटिस की पहचान एक्स-रे और एमआरआई जैसी जांचों के जरिए की जाती है, जिससे जोड़ों और कार्टिलेज की स्थिति का पता चलता है।
बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन-डी, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से दूरी हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। किसी भी तरह के लगातार दर्द या अकड़न को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।